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Varanasi: चार धाम के पुण्य के लिए 25 हजार लोगों ने लगाई चक्रपुष्करिणी कुंड में डुबकी, गूंजा हर-हर महादेव

Sun, 12 May 2024 04:33 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Sun, 12 May 2024 04:33 PM IST
सार

अक्षय तृतीया के दूसरे दिन मणिकर्णिका कुंड में आस्थावानों की भीड़ भारी भीड़ उमड़ी। इस दौरान पुण्य की कामना से 25 हजार से अधिक आस्थावानों ने मणिकर्णिका कुंड में डुबकी लगाई।

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25 thousand devotees took dip in Chakrapushkarini Kund on Manikarnika
चक्रपुष्करिणी कुंड में भक्तों ने लगाई डुबकी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चार धाम में स्नान के पुण्य की कामना से श्रद्धालुओं ने चक्रपुष्करणी कुंड में स्नान किया। अक्षय तृतीया के दूसरे दिन मां मणिकर्णिका की ऊर्जा से भरे हुए कुंड के जल में 25 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। पुण्य की कामना से स्नान के लिए सुबह से ही आस्थावानों की भीड़ मणिकर्णिका कुंड पर जुटने लगी थी।

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मणिकर्णिका घाट स्थित चक्रपुष्करणी तीर्थ कुंड शनिवार को हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा। रोग, दोष और पाप से मुक्ति, अक्षय फल एवं चारों धामों में एक साथ स्नान करने के पुण्यफल की कामना से श्रद्धालुओं ने एक-एक करके डुबकी लगाई।
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मान्यता है कि इसी दिन दोपहर में भगवान विष्णु और शिव समस्त देवी-देवताओं के साथ भी स्नान ध्यान करने के लिए आते हैं। इसी कारण यहां स्थानीय लोगों के साथ ही पूर्वांचल भर से लोग आते हैं।
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25 thousand devotees took dip in Chakrapushkarini Kund on Manikarnika
चक्रपुष्करिणी कुंड में भक्तों ने लगाई डुबकी - फोटो : अमर उजाला
मध्यरात्रि में मां मणिकर्णिका का शृंगार करने के बाद प्रधान पुरोहित जयेंद्र नाथ दुबे बब्बू महाराज ने विधि-विधान से मां मणिकर्णिका का पूजन अर्चन किया। कुंड के मध्य में मां मणिकर्णिका को विराजमान कराया गया। रात भर पूजन के बाद मध्याह्न में मां मणिकर्णिका का पूजन किया गया और दोपहर में 12 बजे शुभ मुहूर्त में माता की आरती उतारी गई।

इसके बाद मां मणिकर्णिका और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ एक साथ पुजारी और श्रद्धालुओं ने कुंड में डुबकी लगाई। इसके साथ ही स्नान का सिलसिला शुरू हो गया। स्नान के बाद माता की मूर्ति को पुनः अपने स्थान पर वापस स्थापित कर दिया गया।

गणपति व महादेव के साथ विराजते हैं श्री हरी
मणिकर्णिका स्थित इस कुंड के बाहर विष्णुचरण पादुका है। यह कुंड घाट ताल से करीब 25 फीट नीचे स्थित है। कुंड में जाने के लिए 17-17 सीढि़यां बनीं हैं। कुंड के किनारे दक्षिण दिशा में भगवान विष्णु, गणेश और शिव की प्रतिमा स्थापित हैं। यहां लोग स्नान करने के बाद जल चढ़ाते हैं। मां मणिकर्णिका के दर्शन वर्ष में केवल एक बार होते हैं। फिर उसके दूसरे दिन मां की विधि-विधान से पूजा अर्चना करने के बाद श्रद्धालु कुंड में स्नान करके मां से पाप मुक्ति का वरदान मांगते हैं।
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