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पीएम ने ली पके चावल की सुगंध
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वाराणसी। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र के लोकार्पण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन प्रयोगशालाएं देखीं। इस दौरान पीएम ने धान की कई प्रजातियों को देखा और पके चावल की सुगंध भी ली। मीलिंग कुकिंग लैब में पीएम ने देखा कि किस प्रकार खाने वाले चावल की टूटन को कम करने पर शोध किया जा रहा है। न्यूट्रीशनल लैब में धान में माइक्रो न्यूट्रेंट बरकरार रखने के लिए होने वाले कार्य जाने। सेंसिरली लैब में पीएम ने देखा कि चावल बनने के बाद उसका एरोमा और चावल की मेडिसिनल वैल्यू को किस प्रकार बरकरार रखा जाता है। ब्लैक एंड ब्राउन राइस को किस प्रकार से और बेहतर किया जा सकता है।
संस्थान में पीएम ने वैज्ञानिकों से बातचीत के दौरान पूछा कि आप लोग चावल पर शोध करते हो, लेकिन चावल खाके आए हो या नहीं। कई वैज्ञानिकों ने कहा कि हां खाके आए हैं। इसके बाद पीएम ने पूछा कि जिन लोगाें को डायबिटीज है, उन लोगों की चावल खाने की लालसा पूरी करेंगे। वैज्ञानिकों ने कहा कि हां पूरी होगी। इस पर शोध होगा।
चावल अनुसंधान संस्थान में शुगर फ्री चावल पर भी शोध होगा। अलग-अलग क्षेत्रों में पैदा होने वाले चावल पर अध्ययन कर पौष्टिक चावल तैयार किया जाएगा। इसमें उच्च आयरन और जिंक के तत्वों को विकसित करने के साथ ग्लाइसेमिक इंडेक्स, आर्सेनिक, कैडमियम स्तर को कम किया जाएगा।
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अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र व बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के बीच समझौता भी हुआ। इसके तहत बीएचयू और केंद्र मिलकर कृषि शिक्षा और शोध पर काम करेंगे। इस दौरान बीएचयू कुलपति प्रो. राकेश भटनागर और संस्थान के महानिदेशक डा. मैथ्यू मोरल के बीच एमओयू का आदान प्रदान हुआ। इसके पहले भी संस्थान की ओर से बीएचयू में कई कार्यक्रम कराए गए थे। पीएम के जाने के बाद सभी लोगों ने बैठकर आगामी कार्ययोजना पर चर्चा की। माना जा रहा है कि यह केंद्र दक्षिण एशिया और अफ्रीका के चावल विज्ञान को आगे बढ़ाएगा।
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संस्थान में पीएम ने वैज्ञानिकों से बातचीत के दौरान पूछा कि आप लोग चावल पर शोध करते हो, लेकिन चावल खाके आए हो या नहीं। कई वैज्ञानिकों ने कहा कि हां खाके आए हैं। इसके बाद पीएम ने पूछा कि जिन लोगाें को डायबिटीज है, उन लोगों की चावल खाने की लालसा पूरी करेंगे। वैज्ञानिकों ने कहा कि हां पूरी होगी। इस पर शोध होगा।
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चावल अनुसंधान संस्थान में शुगर फ्री चावल पर भी शोध होगा। अलग-अलग क्षेत्रों में पैदा होने वाले चावल पर अध्ययन कर पौष्टिक चावल तैयार किया जाएगा। इसमें उच्च आयरन और जिंक के तत्वों को विकसित करने के साथ ग्लाइसेमिक इंडेक्स, आर्सेनिक, कैडमियम स्तर को कम किया जाएगा।
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अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र व बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के बीच समझौता भी हुआ। इसके तहत बीएचयू और केंद्र मिलकर कृषि शिक्षा और शोध पर काम करेंगे। इस दौरान बीएचयू कुलपति प्रो. राकेश भटनागर और संस्थान के महानिदेशक डा. मैथ्यू मोरल के बीच एमओयू का आदान प्रदान हुआ। इसके पहले भी संस्थान की ओर से बीएचयू में कई कार्यक्रम कराए गए थे। पीएम के जाने के बाद सभी लोगों ने बैठकर आगामी कार्ययोजना पर चर्चा की। माना जा रहा है कि यह केंद्र दक्षिण एशिया और अफ्रीका के चावल विज्ञान को आगे बढ़ाएगा।