{"_id":"5b313d1f4f1c1bf96e8ba0fc","slug":"21529953567-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गर्मी संग उमस ने बेचैन किया, जनजीवन बेहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गर्मी संग उमस ने बेचैन किया, जनजीवन बेहाल
Updated Tue, 26 Jun 2018 12:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ज्ञानपुर। आषाढ़ की तपन ने बेचैन कर दिया है। सोमवार को चिलचिलाती धूप के बीच 41 डिग्री पारे से सामान्य जनजीवन उबल उठा। बारिश की आस में टकटकी लगाए लोग जबर्दस्त उमस से बेहाल हो गए। मौसम की तल्खी के चलते लोग बेचैन रहे। न तो दिन में राहत मिली ना ही रात में चैन की नींद। मौसम के जानकार देर रात तक बारिश की आशंका भी जता रहे थे। इससे माना जा रहा है कि बारिश ठीक ठाक हो गई तो लोगों को थोड़ी राहत मिल जाएगी।
सोमवार को पौ फटने के साथ ही उमस ने जकड़ लिया। हवाएं ठप हो गईं और सामान्य जनजीवन पूरे दिन पसीने-पसीने रहा। चिपचिपी गर्मी और उमस के कारण शरीर का पसीना नहीं सूख पाया। कूलर और पंखे की हवा बेमलब साबित होती रही। मौसम की तल्खी के चलते हमेशा पानी से भरे रहने वाले तालाबों में पानी तो दूर की बात है, उनकी तलहटी में दरारें पड़ गईं हैं। जो गर्मी के मिजाज को बयां करने के लिए काफी हैं। बेतहाशा उमस और मौसम के मिजाज को देखते हुए मौसम के जानकार देर रात तक बारिश की आशंका से भी इनकार नहीं कर रहे थे। आषाढ़ में जब बारिश की शिद्दत से जरूरत महसूस की जा रही है, उस समय मौसम की बेरुखी ने किसानों की पेशानी पर भी बल ला दिया है। धान की खेती की तैयारी में जुटे किसानों को अब इंद्रदेव की मेहरबानियों का इंतजार है। माना जा रहा है कि जनजीवन को उबाल रही गर्मी से लोगों को राहत बारिश के बाद ही मिल सकती है।
विज्ञापन
सोमवार को पौ फटने के साथ ही उमस ने जकड़ लिया। हवाएं ठप हो गईं और सामान्य जनजीवन पूरे दिन पसीने-पसीने रहा। चिपचिपी गर्मी और उमस के कारण शरीर का पसीना नहीं सूख पाया। कूलर और पंखे की हवा बेमलब साबित होती रही। मौसम की तल्खी के चलते हमेशा पानी से भरे रहने वाले तालाबों में पानी तो दूर की बात है, उनकी तलहटी में दरारें पड़ गईं हैं। जो गर्मी के मिजाज को बयां करने के लिए काफी हैं। बेतहाशा उमस और मौसम के मिजाज को देखते हुए मौसम के जानकार देर रात तक बारिश की आशंका से भी इनकार नहीं कर रहे थे। आषाढ़ में जब बारिश की शिद्दत से जरूरत महसूस की जा रही है, उस समय मौसम की बेरुखी ने किसानों की पेशानी पर भी बल ला दिया है। धान की खेती की तैयारी में जुटे किसानों को अब इंद्रदेव की मेहरबानियों का इंतजार है। माना जा रहा है कि जनजीवन को उबाल रही गर्मी से लोगों को राहत बारिश के बाद ही मिल सकती है।
विज्ञापन