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हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी
Updated Fri, 25 May 2018 01:12 AM IST
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लालानगर/गोपीगंज/सीतामढ़ी। गंगा दशहरा के पावन पर्व पर बृहस्पतिवार को जिले के गंगा घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हजारों श्रद्धालुओं ने मोक्षदायिनी गंगा में पुण्य की डुबकी लगाकर सुख-सौभाग्य की कामना की। इस दौरान जिले के गंगा घाटों वैदिक मंत्रोच्चार और दैवीय महात्म्य की चर्चा से गूंजते रहे।
रामपुर गंगा घाट पर बृहस्पतिवार को करीब बड़ी संख्या में श्रद्घालुओं ने डुबकी लगाई। गंगा दशहरा के मौके पर घाट पर भोर से ही श्रद्घालुओं की भारी भीड़ जमा होने लगी थी। श्रद्घालुओं ने जहां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई, वहीं घाट के आसपास बैठे गरीबों और ब्राह्मणों को दान-पुण्य किया। इस दौरान विधि-विधान से पूजन अर्चन किया। मान्यता है कि ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा पर्व पर गंगा में स्नान करने वालों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इस दिन गंगा का धरती पर हस्त नक्षत्र में अवतरण की मान्यता है। पुराणों के अनुसार इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। साथ ही गंगा की विशेष पूजा और भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है। गंगा दशहरा पर दान और उपवास का बड़ा महत्व होता है। 10 तरह के पापों को हरने के कारण इसे दशहरा कहते हैं। डुहियां के पं. दीनानाथ शुक्ल के मुताबिक इन दस तरह के पापों में तीन कायिक, चार वाचिक और तीन मानसिक पाप होते हैं। इस साल ज्येष्ठ मास अधिक मास है। इसलिए अधिकमास के शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा मनाया गया। जिस वर्ष अधिकमास होता है, उस वर्ष शुद्घ मास के बजाय अधिकमास में गंगा दशहरा माना जाता है। सीतामढ़ी गंगा घाटों पर भी भोर से ही गंगा स्नान करने वालों का तांता लगा रहा। लोग स्नान के बाद लोक कल्याण के निमित्त मंगलकामनाएं करते नजर आए। इससे घाट का माहौल पूरी तरह भक्तिभाव में लीन नजर आया।
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रामपुर गंगा घाट पर बृहस्पतिवार को करीब बड़ी संख्या में श्रद्घालुओं ने डुबकी लगाई। गंगा दशहरा के मौके पर घाट पर भोर से ही श्रद्घालुओं की भारी भीड़ जमा होने लगी थी। श्रद्घालुओं ने जहां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई, वहीं घाट के आसपास बैठे गरीबों और ब्राह्मणों को दान-पुण्य किया। इस दौरान विधि-विधान से पूजन अर्चन किया। मान्यता है कि ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा पर्व पर गंगा में स्नान करने वालों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इस दिन गंगा का धरती पर हस्त नक्षत्र में अवतरण की मान्यता है। पुराणों के अनुसार इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। साथ ही गंगा की विशेष पूजा और भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है। गंगा दशहरा पर दान और उपवास का बड़ा महत्व होता है। 10 तरह के पापों को हरने के कारण इसे दशहरा कहते हैं। डुहियां के पं. दीनानाथ शुक्ल के मुताबिक इन दस तरह के पापों में तीन कायिक, चार वाचिक और तीन मानसिक पाप होते हैं। इस साल ज्येष्ठ मास अधिक मास है। इसलिए अधिकमास के शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा मनाया गया। जिस वर्ष अधिकमास होता है, उस वर्ष शुद्घ मास के बजाय अधिकमास में गंगा दशहरा माना जाता है। सीतामढ़ी गंगा घाटों पर भी भोर से ही गंगा स्नान करने वालों का तांता लगा रहा। लोग स्नान के बाद लोक कल्याण के निमित्त मंगलकामनाएं करते नजर आए। इससे घाट का माहौल पूरी तरह भक्तिभाव में लीन नजर आया।
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