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मजदूर दिवस : जारी रही रोटी की जंग
Updated Wed, 02 May 2018 12:48 AM IST
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भदोही। एक और मजदूर दिवस बीत गया, लेकिन नगर के मजदूरों के लिए यह दिन भी बाकी दिनों की तरह रहा। रोज की तरह शोभनाथ गौतम और जोखन ने ठेला खींच कर और पंकज यादव ने पल्लेदारी करके रोटी का जुगाड़ किया। न उन्हें किसी संगठन का झंडा उठाने की फुर्सत, न तो भीड़ में शामिल होकर नारे लगाने की। उन्होंने कहा कि उनके लिए हर दिन बराबर होता है, क्योंकि मजदूरी ही उनकी जीवनचर्या बन चुकी है। जिस दिन काम नहीं करेंगे, उस दिन परिवार को क्या खिलाएंगे।
पल्लेदार पंकज ने कहा कि 16 साल से पल्लेदारी कर रहा हूं। मेरा हर दिन मई दिवस की तरह होता है। मई दिवस ही मेरी रोजी रोटी है। यह दिवस क्यों मनाया जाता है? इसका जवाब शोभनाथ को पता है, लेकिन पेट और परिवार की आजीविका किसी कार्यक्रम में शरीक होने से पूरी नहीं होगी। उसके लिए काम करना जरूरी है। मामदेवपुर निवासी जोखन वर्ष 1960 से ठेला खींच रहे हैं। उम्र ढलने के बावजूद वह लगातार यह काम कर रहे हैं। कहते हैं कि कालीन नगरी होने के कारण यहां हर दिन अच्छा काम मिल जाता है। इसलिए काम करके ही क्यों न मई दिवस मनाऊं? 85 वर्षीय शोभनाथ कहते हैं जीवन के अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहे हैं। आने वाली पीढ़ी का जीवन अच्छे से बीते, यही कामना करता रहता हूं। सरकारों को मजदूर हितों के लिए गंभीर होकर कुछ करना चाहिए।
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पल्लेदार पंकज ने कहा कि 16 साल से पल्लेदारी कर रहा हूं। मेरा हर दिन मई दिवस की तरह होता है। मई दिवस ही मेरी रोजी रोटी है। यह दिवस क्यों मनाया जाता है? इसका जवाब शोभनाथ को पता है, लेकिन पेट और परिवार की आजीविका किसी कार्यक्रम में शरीक होने से पूरी नहीं होगी। उसके लिए काम करना जरूरी है। मामदेवपुर निवासी जोखन वर्ष 1960 से ठेला खींच रहे हैं। उम्र ढलने के बावजूद वह लगातार यह काम कर रहे हैं। कहते हैं कि कालीन नगरी होने के कारण यहां हर दिन अच्छा काम मिल जाता है। इसलिए काम करके ही क्यों न मई दिवस मनाऊं? 85 वर्षीय शोभनाथ कहते हैं जीवन के अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहे हैं। आने वाली पीढ़ी का जीवन अच्छे से बीते, यही कामना करता रहता हूं। सरकारों को मजदूर हितों के लिए गंभीर होकर कुछ करना चाहिए।
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