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अनुशासन और संस्कार से जीवन को संवारें
Updated Fri, 16 Mar 2018 01:28 AM IST
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भदोही। पूजा भले कम करो लेकिन भगवान पर तुम्हारा विश्वास अटूट होना चाहिए। धर्म, नीति और मर्यादित जीवन से ही मानव कल्याण संभव है। ये बातें मर्यादपट्टी स्थित रामलीला मैदान में चल रहे सत्संग के छठें दिन साध्वी कृष्णा माता ने कहीं। उन्होंने कहा कि जीवन में अनुशासन, संस्कार समय का कोई मोल नहीं होता। ये सब बहुमूल्य हैं।
माता ने कहा कि समाज में बड़े-छोटे का आदर होना बहुत जरूरी है। इससे परिवारिक जीवन सुखमय बनेगा। माता-पिता के आदर से समाज में सम्मान बढ़ता है ईश्वर उसके अच्छे परिणम देता है। पति-पत्नी के रिश्ते विश्वास के अटूट धागे से बुने होते हैं। एक-दूसरे को समझना और विश्वास बनाना चाहिए। परिवार का ध्यान रखने वाले व्यक्ति का हर जगह ध्यान रखा जाता है। चरित्र की पवित्रता बनाए रखने की भी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि कथा सुनने से बुराई दूर भागती है और भगवान नजदीक आते हैं। मंदिर या संत के पास हमेशा सर झुकाकर जाना चाहिए। इससे अहंकार दूर होता है और मन में दया, करुणा, शिष्टाचार, स्नेह, मानवता व समानता आती होती है।
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माता ने कहा कि समाज में बड़े-छोटे का आदर होना बहुत जरूरी है। इससे परिवारिक जीवन सुखमय बनेगा। माता-पिता के आदर से समाज में सम्मान बढ़ता है ईश्वर उसके अच्छे परिणम देता है। पति-पत्नी के रिश्ते विश्वास के अटूट धागे से बुने होते हैं। एक-दूसरे को समझना और विश्वास बनाना चाहिए। परिवार का ध्यान रखने वाले व्यक्ति का हर जगह ध्यान रखा जाता है। चरित्र की पवित्रता बनाए रखने की भी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि कथा सुनने से बुराई दूर भागती है और भगवान नजदीक आते हैं। मंदिर या संत के पास हमेशा सर झुकाकर जाना चाहिए। इससे अहंकार दूर होता है और मन में दया, करुणा, शिष्टाचार, स्नेह, मानवता व समानता आती होती है।
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