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अयोध्या बन गया टाउनहाल का मैदान
Updated Thu, 15 Mar 2018 02:24 AM IST
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वाराणसी। टाउनहाल का मैदान अयोध्या के रूप में सज गया और भगवान राम के राज्याभिषेक का साक्षी बना। इस दौरान पूरा मैदान हर-हर महादेव और जय श्रीराम के जयघोष से गूंजता रहा। इस अवसर पर श्रीराम दरबार और कथा मंडप की फूल-मालाओं, वंदनवार व कलश से भव्य सजावट की गई थी। राम दरबार की झांकी के दर्शकों के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। अखिल भारतीय मानस प्रचार समिति की ओर से 30वें मानस नवाह्न पारायण एवं श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ के नौवें दिन बुधवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान राज्याभिषेक की परंपरा को जीवंत किया गया।
बुधवार को श्रीराम के राज्याभिषेक समारोह का आरंभ महिलाओं ने कलश यात्रा के साथ किया। इसके उपरांत श्रद्धालुओं ने बैंड बाजे के साथ राज सिंहासन को कंधे पर रखकर कथा मंडप की परिक्रमा के बाद मंच पर स्थापित किया। भगवान के स्वरूपों का प्रवेश बैंड-बाजे के साथ अयोध्या बने कथा मंडप रूपी दरबार में हुआ। उन्हें फिर सिंहासन पर विराजमान कराया गया। इसके उपरांत महंत बालकदास महाराज ने भगवान के स्वरूपों का तिलक कर राज्याभिषेक की परंपरा का निर्वहन किया। भक्तों ने खुशी में पटाखे भी छोड़े। अंत में श्रद्धालुओं को सुख समृद्धि की कामना से पूजित अक्षय सिक्कों का वितरण किया गया।
शाम को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बतौर मुख्य अतिथि अपने आशीर्वचन से श्रीरामकथा को विराम दिया। समिति के अध्यक्ष रविशंकर सिंह ने अतिथियों को धन्यवाद दिया। इसके पूर्व जौनपुर से पधारे पं. दिनेश मिश्र ने कहा कि राम राज्य की नींव समता को लेकर बनती है और महाभारत काल की नींव विषमता को लेकर बनती है। जहां समता आ जाए वहीं रामराज्य है। जहां विषमता आ जाए वहां महाभारत काल आ जाता है। रायसेन के डा. रामाधार शर्मा ने कहा कि कार्य करने के पश्चात भी उसके फल को दूसरों को सौंप देना रामजी की कला है। सुधा पांडेय ने कहा कि श्रीराम समाज के सभी वर्गों को जोड़ देते हैं। इस अवसर पर गिरीशचंद, बच्चालाल केशरी, बनवारी लाल गुप्त, सालिकराम सेठ, इंदुशेखर तिवारी, वासुदेव अग्रवाल, विश्वंभर प्रसाद अग्रवाल, परमहंस दूबे आदि मौजूद रहे।
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बुधवार को श्रीराम के राज्याभिषेक समारोह का आरंभ महिलाओं ने कलश यात्रा के साथ किया। इसके उपरांत श्रद्धालुओं ने बैंड बाजे के साथ राज सिंहासन को कंधे पर रखकर कथा मंडप की परिक्रमा के बाद मंच पर स्थापित किया। भगवान के स्वरूपों का प्रवेश बैंड-बाजे के साथ अयोध्या बने कथा मंडप रूपी दरबार में हुआ। उन्हें फिर सिंहासन पर विराजमान कराया गया। इसके उपरांत महंत बालकदास महाराज ने भगवान के स्वरूपों का तिलक कर राज्याभिषेक की परंपरा का निर्वहन किया। भक्तों ने खुशी में पटाखे भी छोड़े। अंत में श्रद्धालुओं को सुख समृद्धि की कामना से पूजित अक्षय सिक्कों का वितरण किया गया।
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शाम को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बतौर मुख्य अतिथि अपने आशीर्वचन से श्रीरामकथा को विराम दिया। समिति के अध्यक्ष रविशंकर सिंह ने अतिथियों को धन्यवाद दिया। इसके पूर्व जौनपुर से पधारे पं. दिनेश मिश्र ने कहा कि राम राज्य की नींव समता को लेकर बनती है और महाभारत काल की नींव विषमता को लेकर बनती है। जहां समता आ जाए वहीं रामराज्य है। जहां विषमता आ जाए वहां महाभारत काल आ जाता है। रायसेन के डा. रामाधार शर्मा ने कहा कि कार्य करने के पश्चात भी उसके फल को दूसरों को सौंप देना रामजी की कला है। सुधा पांडेय ने कहा कि श्रीराम समाज के सभी वर्गों को जोड़ देते हैं। इस अवसर पर गिरीशचंद, बच्चालाल केशरी, बनवारी लाल गुप्त, सालिकराम सेठ, इंदुशेखर तिवारी, वासुदेव अग्रवाल, विश्वंभर प्रसाद अग्रवाल, परमहंस दूबे आदि मौजूद रहे।
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