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किताबों के हर हर्फ में जिंदा रहेंगे मनु शर्मा : रामगोपाल
Updated Fri, 10 Nov 2017 01:46 AM IST
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वाराणसी। ‘वे अपनी किताबों के हर हर्फ में जिंदा रहेंगे। उन जैसा न कोई था न होगा। वे काशी में रहते हुए राष्ट्रीय फलक पर हिंदी साहित्य के गौरव थे। उनका जाना किसी एक शहर, क्षेत्र या प्रांत की नहीं बल्कि राष्ट्र की ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकेगी।’ साहित्यकार पद्मश्री मनु शर्मा के व्यक्तित्व-कृतित्व के बारे में ये कहना है समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव का। उन्होंने कहा कि वह हिंदी साहित्य के ऐसे देदीप्यमान नक्षत्र थे, जिनके लेखन का उजाला हमेशा रहेगा।
मणिकर्णिका महाश्मशान पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे रामगोपाल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मनु शर्मा के व्यक्तित्व की ऊंचाई को मापा नहीं जा सकता। ‘कृष्ण की आत्मकथा’ जैसी उनकी कृति साहित्य की निधि है। ज्ञान, संस्कृति और कला की नगरी काशी के वह बड़े विद्वानों में से एक थे। उन्होंने अपनी रचनाओं में इतिहास, पुराणों के जरिए वर्तमान को चित्रित किया है। उनका मन जितना सहज था जीवन उतना ही संघर्षशील। वह सामाजिक चेतना का संचार करने वाले साहित्यकार थे। उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। विधि, न्याय मंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि मनु शर्मा सामाजिक संघर्षों को गहराई से जीने वाले सशक्त रचनाकार थे। उन्होंने हिंदी साहित्य की सेवा के जरिए आने वाली पीढ़ी को बहुत कुछ दिया है। ऐसे युग पुरुष के चिंतन से समाज का निरंतर मार्गदर्शन होता रहेगा।
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मणिकर्णिका महाश्मशान पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे रामगोपाल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मनु शर्मा के व्यक्तित्व की ऊंचाई को मापा नहीं जा सकता। ‘कृष्ण की आत्मकथा’ जैसी उनकी कृति साहित्य की निधि है। ज्ञान, संस्कृति और कला की नगरी काशी के वह बड़े विद्वानों में से एक थे। उन्होंने अपनी रचनाओं में इतिहास, पुराणों के जरिए वर्तमान को चित्रित किया है। उनका मन जितना सहज था जीवन उतना ही संघर्षशील। वह सामाजिक चेतना का संचार करने वाले साहित्यकार थे। उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। विधि, न्याय मंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि मनु शर्मा सामाजिक संघर्षों को गहराई से जीने वाले सशक्त रचनाकार थे। उन्होंने हिंदी साहित्य की सेवा के जरिए आने वाली पीढ़ी को बहुत कुछ दिया है। ऐसे युग पुरुष के चिंतन से समाज का निरंतर मार्गदर्शन होता रहेगा।
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