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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   21 Techno-Friendly Vedic Scholars to Conduct Research on Sutras Such as Karma and Justice at BHU

BHU: कर्म-न्याय जैसे सूत्रों पर रिसर्च करेंगे 21 टेक्नो फ्रेंडली विद्वान, नियुक्ति के लिए विषय की योग्यता जारी

Wed, 15 Apr 2026 03:15 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Wed, 15 Apr 2026 03:15 PM IST
सार

Varanasi News: बीएचयू में कर्म-न्याय जैसे सूत्रों पर 21 टेक्नो फ्रेंडली वैदिक विद्वान रिसर्च करेंगे। विद्वानों को इंजीनियरिंग, अंतरिक्ष विज्ञान, आधुनिकता आदि का ज्ञान होना चाहिए। 
 

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21 Techno-Friendly Vedic Scholars to Conduct Research on Sutras Such as Karma and Justice at BHU
बनारस हिंदी विश्वविद्यालय, BHU - फोटो : X (@bhupro)

विस्तार

बीएचयू में कर्म, न्याय, विधि और शल्य सहित प्राचीन भारतीय सूत्रों पर रिसर्च करके उसे आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ा जाएगा। 21 टेक्नो फ्रेंडली वैदिक विद्वान रिसर्च करेंगे। सुश्रुत, जैमिनी, नारद, विश्वामित्र, गौतम, वादरायण और सनत्कुमार के सूत्रों, सिद्धांतों और संहिताओं को तकनीक, इंजीनियरिंग, अंतरिक्ष, खगोल, विधि और मैनेजमेंट के साथ मिलाकर अध्ययन किया जाएगा। जैसे कि महर्षि गौतम के न्याय शास्त्र की मूल बातों को आज के विवादों पर लागू करके देखा जाएगा कि कितना कारगर है। वहीं, जैमिनी की मीमांसा और विश्वामित्र के कर्म सिद्धांत नारद मुनि के भक्ति सूत्रों को आज की आधुनिकता के साथ मिलाकर रिसर्च किया जाएगा।

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बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र में नए 21 वैदिक विद्वानों की नियुक्तियां होंगी, जिन्हें आधुनिक विज्ञान का भी ज्ञान होना जरूरी होगा। इनकी योग्यता का विवरण बीएचयू ने जारी कर दिया है। इनमें सात विद्वान सात ऋषियों के चेयर प्रोफेसर और बाकी 14 उनके अंतर्गत रिसर्च का कार्य करेंगे। केंद्र में इसका एजेंडा बनाया जाएगा।
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चेयर प्रोफेसर सहित विजिटिंग फेलो के रिसर्च की समीक्षा वैदिक विज्ञान केंद्र की संचालन समिति की ओर से की जाएगी। इसी के आधार पर उनका कार्यकाल आगे के लिए बढ़ाया जाएगा। इनका कार्यकाल दो से लेकर पांच साल तक का होगा। ये दोबारा आवेदन के लिए पात्र माने जाएंगे।

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ब्रह्मसूत्र के 555 सूत्रों पर होगा रिसर्च

सुश्रुत के शल्य चिकित्सा के सिद्धांतों को वर्तमान के ऑपरेशन और इलाज से जोड़कर रिसर्च किया जाएगा। 555 सूत्रों वाले ब्रह्मसूत्र के रचनाकार वादरायण पर रिसर्च होगा। इसके तहत ब्रह्म ज्ञान आत्म साक्षात्कार और मोक्ष प्राप्ति आदि पर शोध किए जाएंगे। ब्रह्मा के शिष्यों में से एक सनत कुमार संहिता पर भी अध्ययन किया जाएगा। इसके अलावा बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र विज्ञान और तकनीक में काम कर रहे विभागों के साथ सहयोग से भी रिसर्च कराएगा। वैदिक विद्वानों को इसके लिए केंद्र में लैब और ग्रंथों को उपलब्ध कराने के साथ ही तकनीकी मदद भी दी जाएगी। इन पदों पर रिसर्च करने के लिए युवा और बुजुर्गों में कोई असमानता नहीं रखी गई है। चेयर प्रोफेसर के लिए तो उम्र की सीमा 80 वर्ष तक रखी गई है। विजिटिंग फेलो और शोध सहायक की विशेषज्ञता धर्मशास्त्र, ज्योतिष, दर्शन, फिजिक्स, केमेस्ट्री, इंजीनियरिंग, पर्यावरण, गणित जैसे किसी विषय में होनी चाहिए।
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