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बीएचयू संगीत एवं मंच संकाय में पूर्वाचार्य संगीत समारोह का समापन
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वाराणसी। बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय में चल रहे चार दिवसीय पूर्वाचार्य संगीत समारोह का समापन शनिवार को गायन, वादन, नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। इस दौरान संकाय के शिक्षकों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से अंतिम दिन के समारोह को यादगार बना दिया। कार्यक्रम में सितार और तबले की जुगलबंदी आकर्षण का केंद्र रही।
पंडित ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में शनिवार का कार्यक्रम पूर्व आचार्य पंडित अमरनाथ मिश्र को समर्पित रहा। डॉ. मधुमिता भट्टाचार्या के प्रार्थना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद गायन में डॉ. रामशंकर ने संगीत रामायण की प्रस्तुति की, जिसमें तबले पर कुबेर नाथ मिश्रा, हारमोनियम पर पंकज मिश्रा ने संगत की। राग नट में बंदौ चरण कमल तुलसी के। प्रस्तुति के बाद राग विहागड़ा में झपताल- गंगातीर पे ठाड़े रघुवीर और राग चरुकेशी ताल रूपक में रघुवर राजा नैया न चढ़ाऊं तोहे की प्रस्तुति की। अंत में कही कही हारे लखन रघुराई, से समापन किया। डॉ. बिलंबिता वानी सुधा ने राग सुध-सारंग में विलंबित ख्याल पनहा मांगता परमेश्वर और छोटा ख्याल जारे कगवा लारे मोरे की प्रस्तुति की।
डॉ. सुवर्ण खुटिया ने श्याम कल्याण में विलंबित एक ताल, मध्यलय तीन ताल और तराना में कार्यक्रम प्रस्तुत किया। डॉ. विधि नागर ने भावपूर्ण कथक नृत्य की प्रस्तुति कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। अंतिम प्रस्तुति में प्रो. बीरेंद्र नाथ मिश्र ने सितार वादन में राग पूरिया से कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसमें आलाप, जोड़, झाला के बाद विलंबित एवं द्रुत लय की बंदिश प्रस्तुत की जो तीनताल में निबद्ध थी।। उन्होंने बनारस की प्रसिद्ध होली मोपे डारो न रंग गिरधारी की प्रस्तुति की, जिसमें तबले पर डॉ. रजनीश तिवारी ने संगत की। इससे पहले संकाय प्रमुख प्रो. राजेश शाह, प्रो. संगीता पंडित, प्रो. प्रवीण उद्धव, डॉ. सुप्रिया शाह ने पंडित ओंकारनाथ ठाकुर, महामना मालवीय के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय, प्रीति सिंह, डॉ. केए चंचल, डॉ. रश्मि चौधरी आदि मौजूद रहे।
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पंडित ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में शनिवार का कार्यक्रम पूर्व आचार्य पंडित अमरनाथ मिश्र को समर्पित रहा। डॉ. मधुमिता भट्टाचार्या के प्रार्थना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद गायन में डॉ. रामशंकर ने संगीत रामायण की प्रस्तुति की, जिसमें तबले पर कुबेर नाथ मिश्रा, हारमोनियम पर पंकज मिश्रा ने संगत की। राग नट में बंदौ चरण कमल तुलसी के। प्रस्तुति के बाद राग विहागड़ा में झपताल- गंगातीर पे ठाड़े रघुवीर और राग चरुकेशी ताल रूपक में रघुवर राजा नैया न चढ़ाऊं तोहे की प्रस्तुति की। अंत में कही कही हारे लखन रघुराई, से समापन किया। डॉ. बिलंबिता वानी सुधा ने राग सुध-सारंग में विलंबित ख्याल पनहा मांगता परमेश्वर और छोटा ख्याल जारे कगवा लारे मोरे की प्रस्तुति की।
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डॉ. सुवर्ण खुटिया ने श्याम कल्याण में विलंबित एक ताल, मध्यलय तीन ताल और तराना में कार्यक्रम प्रस्तुत किया। डॉ. विधि नागर ने भावपूर्ण कथक नृत्य की प्रस्तुति कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। अंतिम प्रस्तुति में प्रो. बीरेंद्र नाथ मिश्र ने सितार वादन में राग पूरिया से कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसमें आलाप, जोड़, झाला के बाद विलंबित एवं द्रुत लय की बंदिश प्रस्तुत की जो तीनताल में निबद्ध थी।। उन्होंने बनारस की प्रसिद्ध होली मोपे डारो न रंग गिरधारी की प्रस्तुति की, जिसमें तबले पर डॉ. रजनीश तिवारी ने संगत की। इससे पहले संकाय प्रमुख प्रो. राजेश शाह, प्रो. संगीता पंडित, प्रो. प्रवीण उद्धव, डॉ. सुप्रिया शाह ने पंडित ओंकारनाथ ठाकुर, महामना मालवीय के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय, प्रीति सिंह, डॉ. केए चंचल, डॉ. रश्मि चौधरी आदि मौजूद रहे।
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