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अस्पतालों गर्मी से निपटने के इंतजाम नहीं
Updated Fri, 30 Mar 2018 01:27 AM IST
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ज्ञानपुर। गर्मी बढ़ने के साथ मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है लेकिन सरकारी अस्पतालों में इंतजाम नहीं बढ़े। जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी में लोग उल्टी-दस्त, बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है लेकिन न तो अलग से कोई वार्ड बनाए गए और न ही अतिरिक्त दवाओं का भंडारण किया गया है। स्वास्थ्य महकमा पारंपरिक तैयारियों के बूते ही गर्मी से निबटने की तैयारी में है।
जिला अस्पताल ज्ञानपुर में हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए कोई वार्ड नहीं बनाया गया है। न ही अतिरिक्त दवाओं के इतजाम किए गए। इमरजेंसी में चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने के बारे में भी विचार नहीं किया जा रहा है। कहने को तो जिला अस्पताल है, मगर गंभीर मरीजों को तत्काल रेफर कर दिया जाता है। केवल सामान्य मरीज ही यहां भर्ती किए जाते हैं। अस्पताल में पर्याप्त दवाएं भी नहीं हैं। दवा खरीद में अस्पताल प्रशासन खूब खेल करता है। सरकार की मनाही के बावजूद कमीशन के चक्कर में अस्पताल के चिकित्सक मरीजों को बाहर की दवा लिखते हैं। मेट्रोजिल, सिप्रो, पैरासिटामाल, सिट्रीजिन आदि के अलावा गैस की नार्मल दवाओं को छोड़ दें तो ज्यादातर दवाएं मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। यही नहीं, जिला अस्पताल में एक भी सर्जन नहीं है। ऐसे में आपरेशन के लिए मरीजों को दूसरे अस्पतालों में जाना पड़ता है।
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जिला अस्पताल ज्ञानपुर में हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए कोई वार्ड नहीं बनाया गया है। न ही अतिरिक्त दवाओं के इतजाम किए गए। इमरजेंसी में चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने के बारे में भी विचार नहीं किया जा रहा है। कहने को तो जिला अस्पताल है, मगर गंभीर मरीजों को तत्काल रेफर कर दिया जाता है। केवल सामान्य मरीज ही यहां भर्ती किए जाते हैं। अस्पताल में पर्याप्त दवाएं भी नहीं हैं। दवा खरीद में अस्पताल प्रशासन खूब खेल करता है। सरकार की मनाही के बावजूद कमीशन के चक्कर में अस्पताल के चिकित्सक मरीजों को बाहर की दवा लिखते हैं। मेट्रोजिल, सिप्रो, पैरासिटामाल, सिट्रीजिन आदि के अलावा गैस की नार्मल दवाओं को छोड़ दें तो ज्यादातर दवाएं मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। यही नहीं, जिला अस्पताल में एक भी सर्जन नहीं है। ऐसे में आपरेशन के लिए मरीजों को दूसरे अस्पतालों में जाना पड़ता है।
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