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मुफलिसी से लड़ कर बेटे को बनाया ‘अव्वल’
Updated Sat, 17 Jun 2017 01:43 AM IST
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वाराणसी। कभी साड़ी की सफाई की, तो कभी कुरियर मैन बने और अब गाड़ियों की इंट्री और आउट का लेखा जोखा तैयार करते हैं। इन सबसे जो कुछ कमाते, बेटे के लिए किताबें खरीद लाते। जिंदगी की मुफलिसी के कांटों से खुद तो जख्मी हैं, पर बेटे को इससे बचाते रहे। आंख में पल रहे सपने को इस पिता ने अपने बेटे को विरासत में दे दिया है। आज इनके बेटे का नाम पूरे शहर में छा गया है। मोहम्मद इमरान, जिसने यूपी बोर्ड की हाईस्कूल की परीक्षा में पूरे जिले में अव्वल स्थान हासिल किया है। ईद से पहले ये खुशी पाकर आज परिवार तो निहाल है ही पूरा कस्बा बेटे की कामयाबी और पिता के संघर्ष को सलाम कर रहा है।
इस मेधावी के पिता सईद अहमद सिद्दीकी का पूरा परिवार मुफलिसी के दौर से गुजर रहा है। रामनगर की एक फैक्ट्री में महज साढ़े पांच हजार की नौकरी कर रहे हैं। भरे पूरे परिवार का गुजारा इतनी कमाई से बड़ी मुश्किल से चलता है, बावजूद इसके सईद ने अपने बच्चों को तालीम दिलाने में पीछे नहीं रहे। मोहम्मद इमरान को अभी लंका सफर तय करना है, उसकी सफलता से पिता गदगद भी लेकिन चिंता की एक लकीर भी माथे पर खिंच गई है।
बेटे का सपना इंजीनियरिंग बनना है लेकिन कोचिंग और कालेज की फीस के लिए अभी उन्हें और कितना पेट काटना होगा, उन्हें भी नहीं मालूम लेकिन बेटे का सपना पूरा करने को वो पूरे उत्साह के साथ तैयार हैं। मोहम्मद इमरान बताते हैं कि पापा ने उनकी हर ख्वाहिश पूरी की। हमेशा यही कहा कि तुम पढ़ो, फीस किताबें कहां से आएंगी इसकी फिक्त्रस् तुम मुझ पर छोड़ दो। घर की गाड़ी चलाने में अम्मी अफसाना बेगम भी टीन शेड के घर में आरी का काम करती हैं लेकिन उन्होंने कभी मुझे कोई काम करने का दबाव नहीं बनाया। छोटे भाई व बहन की भी पढ़ाई पर उनका पूरा जोर है। वहीं, सईद कहते हैं कि मेरे बेटे ने पूरे जिले का नाम रौशन किया है लेकिन किसी संस्था ने अब तक कोई हौसले के बोल नहीं बोले और ना ही कोई मदद को आगे आया।
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इस मेधावी के पिता सईद अहमद सिद्दीकी का पूरा परिवार मुफलिसी के दौर से गुजर रहा है। रामनगर की एक फैक्ट्री में महज साढ़े पांच हजार की नौकरी कर रहे हैं। भरे पूरे परिवार का गुजारा इतनी कमाई से बड़ी मुश्किल से चलता है, बावजूद इसके सईद ने अपने बच्चों को तालीम दिलाने में पीछे नहीं रहे। मोहम्मद इमरान को अभी लंका सफर तय करना है, उसकी सफलता से पिता गदगद भी लेकिन चिंता की एक लकीर भी माथे पर खिंच गई है।
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बेटे का सपना इंजीनियरिंग बनना है लेकिन कोचिंग और कालेज की फीस के लिए अभी उन्हें और कितना पेट काटना होगा, उन्हें भी नहीं मालूम लेकिन बेटे का सपना पूरा करने को वो पूरे उत्साह के साथ तैयार हैं। मोहम्मद इमरान बताते हैं कि पापा ने उनकी हर ख्वाहिश पूरी की। हमेशा यही कहा कि तुम पढ़ो, फीस किताबें कहां से आएंगी इसकी फिक्त्रस् तुम मुझ पर छोड़ दो। घर की गाड़ी चलाने में अम्मी अफसाना बेगम भी टीन शेड के घर में आरी का काम करती हैं लेकिन उन्होंने कभी मुझे कोई काम करने का दबाव नहीं बनाया। छोटे भाई व बहन की भी पढ़ाई पर उनका पूरा जोर है। वहीं, सईद कहते हैं कि मेरे बेटे ने पूरे जिले का नाम रौशन किया है लेकिन किसी संस्था ने अब तक कोई हौसले के बोल नहीं बोले और ना ही कोई मदद को आगे आया।
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