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देश का भविष्य तय करने जा रहा यह चुनाव
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वाराणसी। यह चुनाव देश का भविष्य तय करने जा रहा है लेकिन यह लड़ाई आखिरी नहीं है। चुनाव के बाद तीन तरह की स्थितियाें के बनने के आसार हैं। एक तो यह सरकार जा सकती है, दूसरी कमजोर हो सकती है और तीसरी स्थिति विपक्ष के लिए सरकार बनाने का मौका मिल सकता है।
उक्त विचार सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने व्यक्त किए। वह रविवार को मैदागिन स्थित पराड़कर स्मृति भवन में आंबेडकर-भगत सिंह विचार मंच और एपवा की ओर से आयोजित जज लोया की मौत पर आधारित पुस्तक सत्ता की सूली के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने सांप्रदायिक हिंसा से उत्पन्न खतरों की ओर इशारा करते हुए कहा कि विपक्ष की सरकार बनने के बाद भी लड़ाई अधूरी रहेगी, जब तक जमीनी स्तर पर इस ताकत के खिलाफ गोलबंदी कर इसको जड़ से उखाड़ कर नहीं फेंका जाता है। तीस्ता का कहना था कि इस चुनाव में सिर्फ एक कसौटी हो सकती है वो इस ताकत को हराने वाली ताकत के पक्ष में मतदान करना। वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र मिश्र, प्रदीप सिंह और उपेंद्र चौधरी द्वारा लिखित सत्ता की सूली पुस्तक में मौजूद सामग्री का जिक्र करते हुए सीतलवाड़ ने कहा कि यह पुस्तक लोकतंत्र के खतरे की आशंका को तथ्यों के साथ लोगों के सामने प्रदर्शित करती है। वरिष्ठ आलोचक चौथीराम यादव ने कहा कि सत्ता की सूली किताब और आज का विषय प्रासंगिक हो गया है। लोकतंत्र पर शिकंजा कसता जा रहा है। इस दौरान सुरेश प्रताप सिंह, मो. हनीफ, एसपी राय, महेंद्र मिश्र, रणधीर सिंह, लेनिन रघुवंशी आदि ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन सुनील यादव ने किया।
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उक्त विचार सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने व्यक्त किए। वह रविवार को मैदागिन स्थित पराड़कर स्मृति भवन में आंबेडकर-भगत सिंह विचार मंच और एपवा की ओर से आयोजित जज लोया की मौत पर आधारित पुस्तक सत्ता की सूली के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रही थीं।
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उन्होंने सांप्रदायिक हिंसा से उत्पन्न खतरों की ओर इशारा करते हुए कहा कि विपक्ष की सरकार बनने के बाद भी लड़ाई अधूरी रहेगी, जब तक जमीनी स्तर पर इस ताकत के खिलाफ गोलबंदी कर इसको जड़ से उखाड़ कर नहीं फेंका जाता है। तीस्ता का कहना था कि इस चुनाव में सिर्फ एक कसौटी हो सकती है वो इस ताकत को हराने वाली ताकत के पक्ष में मतदान करना। वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र मिश्र, प्रदीप सिंह और उपेंद्र चौधरी द्वारा लिखित सत्ता की सूली पुस्तक में मौजूद सामग्री का जिक्र करते हुए सीतलवाड़ ने कहा कि यह पुस्तक लोकतंत्र के खतरे की आशंका को तथ्यों के साथ लोगों के सामने प्रदर्शित करती है। वरिष्ठ आलोचक चौथीराम यादव ने कहा कि सत्ता की सूली किताब और आज का विषय प्रासंगिक हो गया है। लोकतंत्र पर शिकंजा कसता जा रहा है। इस दौरान सुरेश प्रताप सिंह, मो. हनीफ, एसपी राय, महेंद्र मिश्र, रणधीर सिंह, लेनिन रघुवंशी आदि ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन सुनील यादव ने किया।
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