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विश्वनाथ मंदिर में ड्यूटी के दौरान सीआरपीएफ के जवान की मौत
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वाराणसी। काशी विश्वनाथ मंदिर के ढुंढिराज गेट नंबर एक के पास स्थित कैंप में मंगलवार को 95 बटालियन सीआरपीएफ के जवान श्रीकांत सिंह (38) की अचानक तबीयत खराब हुई। मंडलीय अस्पताल ले जाए जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत की वजह हृदय गति का रुकना बताया गया है। पहड़िया स्थित 95 बटालियन के हेडक्वार्टर पर श्रद्धांजलि देने के बाद राजकीय सम्मान के साथ मणिकर्णिका घाट पर श्रीकांत के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। पांच साल के बेटे शिवांश ने मुखाग्नि दी।
गाजीपुर जिले के करंडा थाना के गोसंदेपुर के मूल निवासी श्रीकांत 2004 में सीआरपीएफ में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुए थे। श्रीकांत के साथी जवानों ने बताया कि ड्यूटी करने के बाद वह कैंप में कुर्सी पर बैठ कर आराम कर रहे थे। उन्हें फिर ड्यूटी करनी थी। सुबह करीब पांच बजे श्रीकांत को सीने में दर्द और घबराहट महसूस हुई तो उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सीआरपीएफ की सूचना पर गांव से उनके पिता सीआरपीएफ से सेवानिवृत्त हरिशंकर सिंह, मां कौशल्या देवी और दो भाई सहित अन्य परिजन मंडलीय अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बताया कि पत्नी प्रियंका, बेटे शिवांश और बेटी दिव्यांशी के साथ श्रीकांत पहड़िया क्षेत्र में किराये के मकान में रहते थे। श्रीकांत की पत्नी और मां का बिलखना देख उन्हें ढांढस बंधा रहे लोगों की हिम्मत भी जवाब दे जा रही थी।
दो दिन पहले कराया था बच्चे का मुंडन
परिजनों ने बताया कि श्रीकांत ने दो दिन पहले ही अपने बेटे का मुंडन कराया था तो पूरे परिवार के लोग इकट्ठा हुए थे। अपने मकान की नींव भी श्रीकांत ने कुछ दिन पहले ही रखी थी। वहीं, बटालियन के साथियों ने बताया कि श्रीकांत स्वास्थ्य के प्रति गंभीर रहते थे। हंसमुख स्वभाव वाले श्रीकांत रोजाना योग करते थे। 95 बटालियन के कमांडेंट एनपी सिंह और जवानों ने श्रीकांत की मौत पर दुख जताते हुए कहा कि शोक संतप्त परिवार के साथ वो हमेशा खड़े रहेंगे।
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गाजीपुर जिले के करंडा थाना के गोसंदेपुर के मूल निवासी श्रीकांत 2004 में सीआरपीएफ में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुए थे। श्रीकांत के साथी जवानों ने बताया कि ड्यूटी करने के बाद वह कैंप में कुर्सी पर बैठ कर आराम कर रहे थे। उन्हें फिर ड्यूटी करनी थी। सुबह करीब पांच बजे श्रीकांत को सीने में दर्द और घबराहट महसूस हुई तो उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सीआरपीएफ की सूचना पर गांव से उनके पिता सीआरपीएफ से सेवानिवृत्त हरिशंकर सिंह, मां कौशल्या देवी और दो भाई सहित अन्य परिजन मंडलीय अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बताया कि पत्नी प्रियंका, बेटे शिवांश और बेटी दिव्यांशी के साथ श्रीकांत पहड़िया क्षेत्र में किराये के मकान में रहते थे। श्रीकांत की पत्नी और मां का बिलखना देख उन्हें ढांढस बंधा रहे लोगों की हिम्मत भी जवाब दे जा रही थी।
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दो दिन पहले कराया था बच्चे का मुंडन
परिजनों ने बताया कि श्रीकांत ने दो दिन पहले ही अपने बेटे का मुंडन कराया था तो पूरे परिवार के लोग इकट्ठा हुए थे। अपने मकान की नींव भी श्रीकांत ने कुछ दिन पहले ही रखी थी। वहीं, बटालियन के साथियों ने बताया कि श्रीकांत स्वास्थ्य के प्रति गंभीर रहते थे। हंसमुख स्वभाव वाले श्रीकांत रोजाना योग करते थे। 95 बटालियन के कमांडेंट एनपी सिंह और जवानों ने श्रीकांत की मौत पर दुख जताते हुए कहा कि शोक संतप्त परिवार के साथ वो हमेशा खड़े रहेंगे।
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