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बच्चों के लिए बनेंगे विशेष शौचालय
Updated Wed, 14 Mar 2018 01:27 AM IST
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ज्ञानपुर। परिषदीय स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर शौच जाने के लिए परेशान होने वाले मासूमों और बच्चों को अब परेशान नहीं होना पड़ेगा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्कूलों में चाइल्ड फ्रेंडली तो आंगनबाड़ी केंद्रों में बेबी फ्रेंडली टॉयलेट बनाए जाएंगे। जिले के चयनित 67 मॉडल स्कूलों में इसका आगाज हो गया है। आगामी वित्तीय वर्ष में सभी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में कामकाज शुरू हो जाएगा।
जिले में 1116 प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय संचालित होते हैं। स्कूल निर्माण के समय ही शौचालय का निर्माण होता है, लेकिन देखरेख का अभाव एवं पानी की समुचित व्यवस्था न होने से वह कुछ ही दिनों में ही अनुपयोगी हो जाते हैं। इससे पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं को खुले में शौच की जलालत झेलनी पड़ती है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने के साथ ही स्कूलों को भी बेहतर बनाने की कवायद चल रही है। डीएम विशाख जी की निगरानी में दो चरणों में 67 स्कूलों का चयन कर उन्हें मॉडल बनाया जा रहा है। इसमें जोरईं, सर्रोई समेत सात स्कूल और उनके शौचालय का लोकार्पण हो चुका है। जो स्कूल एवं आंगनबाड़ी केंद्र बचे हैं, उन्हें 15 अगस्त तक पूर्ण करना है। खास है कि चाइल्ड फ्रेंडली शौचालय सामान्य शौचालयों से अलग होंगे। उसमें बच्चों को बैठने की बेहतर सुविधा होने के साथ ही हाथ आदि साफ करने के लिए पानी की समुचित व्यवस्था होगी। इसी तरह बेबी फ्रेंडली शौचालय छोटे बच्चों की सहूलियत के हिसाब से बनाया जाएगा। जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल त्रिपाठी ने कहा कि इस शौचालय में यूरिनल की व्यवस्था भी रहेगी। शौचालय बनने वाली दीवारों पर आकर्षक पेेंटिग की जाएगी, जिससे बच्चे आकर्षित रहेंगे।
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जिले में 1116 प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय संचालित होते हैं। स्कूल निर्माण के समय ही शौचालय का निर्माण होता है, लेकिन देखरेख का अभाव एवं पानी की समुचित व्यवस्था न होने से वह कुछ ही दिनों में ही अनुपयोगी हो जाते हैं। इससे पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं को खुले में शौच की जलालत झेलनी पड़ती है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने के साथ ही स्कूलों को भी बेहतर बनाने की कवायद चल रही है। डीएम विशाख जी की निगरानी में दो चरणों में 67 स्कूलों का चयन कर उन्हें मॉडल बनाया जा रहा है। इसमें जोरईं, सर्रोई समेत सात स्कूल और उनके शौचालय का लोकार्पण हो चुका है। जो स्कूल एवं आंगनबाड़ी केंद्र बचे हैं, उन्हें 15 अगस्त तक पूर्ण करना है। खास है कि चाइल्ड फ्रेंडली शौचालय सामान्य शौचालयों से अलग होंगे। उसमें बच्चों को बैठने की बेहतर सुविधा होने के साथ ही हाथ आदि साफ करने के लिए पानी की समुचित व्यवस्था होगी। इसी तरह बेबी फ्रेंडली शौचालय छोटे बच्चों की सहूलियत के हिसाब से बनाया जाएगा। जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल त्रिपाठी ने कहा कि इस शौचालय में यूरिनल की व्यवस्था भी रहेगी। शौचालय बनने वाली दीवारों पर आकर्षक पेेंटिग की जाएगी, जिससे बच्चे आकर्षित रहेंगे।
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