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उस्ताद के घराने में शहनाई हो गई खामोश
Updated Sun, 11 Feb 2018 02:20 AM IST
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वाराणसी। भारतरत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के घराने की शहनाई खामोश हो गई। उस्ताद की विरासत को आगे बढ़ाने वाले उनके बेटे उस्ताद जामिन हुसैन ने भी इस दुनिया को अलविदा कह दिया। शनिवार को सुबह साढ़े नौ बजे उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके साथ ही भारतरत्न के घराने में शहनाई के एक युग का अंत हो गया। उनकी दूसरी पीढ़ी में उनके पोते शहनाई पर साज तो दे रहे हैं लेकिन अब शायद शहनाई को वो ऊंचाई न मिल सके।
उस्ताद के बड़े बेटे मेहताब हुसैन ने अपने अब्बा के साथ सुर मिला। उनके दूसरे बेटे नायाब हुसैन नैयर ने उस्ताद की विरासत को आगे बढ़ाया और अच्छे शहनाई वादकों में गिने गए। हालांकि अब्बा के जाने के करीब दो साल बाद उनका भी इंतकाल हो गया। उस्ताद जामिन हुसैन ने भी अपनी अब्बा की दी गई विरासत को आगे बढ़ाया लेकिन बीते दो साल से बीमारी की वजह से उन्होंने भी लगभग शहनाई बजाना छोड़ ही दिया था। हालांकि मुहर्रम के दौरान अपने अब्बा उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की परंपरा पूरी अकीदत के साथ वो निभाते रहे। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां मुहर्रम की पांचवीं और आठवीं तारीख को अपनी चांदी की शहनाई पर आंसुओं का नजराना पेश किया करते थे। उनके जाने के बाद नायाब हुसैन ने ये परंपरा निभाई और उनके जाने के बाद जामिन हुसैन ने ये जिम्मा उठाया। आज उनके जाने के बाद अब इस परंपरा को कौन निभाएगा, ये भी सवाल है क्योंकि उनके दोनों छोटे भाई शहनाई नहीं बजाते।
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उस्ताद के बड़े बेटे मेहताब हुसैन ने अपने अब्बा के साथ सुर मिला। उनके दूसरे बेटे नायाब हुसैन नैयर ने उस्ताद की विरासत को आगे बढ़ाया और अच्छे शहनाई वादकों में गिने गए। हालांकि अब्बा के जाने के करीब दो साल बाद उनका भी इंतकाल हो गया। उस्ताद जामिन हुसैन ने भी अपनी अब्बा की दी गई विरासत को आगे बढ़ाया लेकिन बीते दो साल से बीमारी की वजह से उन्होंने भी लगभग शहनाई बजाना छोड़ ही दिया था। हालांकि मुहर्रम के दौरान अपने अब्बा उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की परंपरा पूरी अकीदत के साथ वो निभाते रहे। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां मुहर्रम की पांचवीं और आठवीं तारीख को अपनी चांदी की शहनाई पर आंसुओं का नजराना पेश किया करते थे। उनके जाने के बाद नायाब हुसैन ने ये परंपरा निभाई और उनके जाने के बाद जामिन हुसैन ने ये जिम्मा उठाया। आज उनके जाने के बाद अब इस परंपरा को कौन निभाएगा, ये भी सवाल है क्योंकि उनके दोनों छोटे भाई शहनाई नहीं बजाते।
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