{"_id":"5a7e07cd4f1c1bb3208b8627","slug":"191518208973-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विश्वास के लिए संवाद बनाने की जरूरत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विश्वास के लिए संवाद बनाने की जरूरत
Updated Sat, 10 Feb 2018 02:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। बीएचयू सामाजिक विज्ञान संकाय के नेपाली अध्ययन केंद्र की ओर से शुक्रवार को आयोजित परिचर्चा में भारत-नेपाल संबंधों पर विस्तृत चर्चा हुई। बतौर मुख्य अतिथि नेपाल सरकार के पूर्व विदेश मंत्री डॉ. प्रकाश शरण महत ने कहा कि भारत-नेपाल के बीच विश्वास बहाली के लिए सरकार एवं आम जनता के बीच संवाद बनाने की जरूरत है।
भारत-नेपाल संबंध पर बोलते हुए डॉ. महत ने कहा कि दोनों देशों के बीच स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम की शुरूआत करनी चाहिए, जिससे एक-दूसरे देश की भावना को अच्छे से समझा जा सके। नेपाल का बनारस से ऐतिहासिक संबंध रहा है। नेपाल-भारत के बीच सीमा विवाद की समस्या की वजह से आयात-निर्यात में मुसीबत का सामना करना पड़ता है, जो दोनों देशों के लिए विकास के लिए हानिकारक है। मधेशी आंदोलन के समय कुछ भारत विरोधी शक्तियों ने भारत की छवि को नेपाली जनता के बीच नकारात्मक रूप में प्रदर्शित किया। इस दौरान पूर्व विदेश मंत्री के साथ आए शिक्षकों, शोध छात्रों ने अपने विचार रखे। इस दौरान केंद्र समन्वयक प्रो.भूपेंद्र विक्रम सिंह, डॉ. नृपेंद्र प्रताप सिंह, प्रो. एके कौल, प्रो. टीपी सिंह, प्रो. राकेश रमन आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
भारत-नेपाल संबंध पर बोलते हुए डॉ. महत ने कहा कि दोनों देशों के बीच स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम की शुरूआत करनी चाहिए, जिससे एक-दूसरे देश की भावना को अच्छे से समझा जा सके। नेपाल का बनारस से ऐतिहासिक संबंध रहा है। नेपाल-भारत के बीच सीमा विवाद की समस्या की वजह से आयात-निर्यात में मुसीबत का सामना करना पड़ता है, जो दोनों देशों के लिए विकास के लिए हानिकारक है। मधेशी आंदोलन के समय कुछ भारत विरोधी शक्तियों ने भारत की छवि को नेपाली जनता के बीच नकारात्मक रूप में प्रदर्शित किया। इस दौरान पूर्व विदेश मंत्री के साथ आए शिक्षकों, शोध छात्रों ने अपने विचार रखे। इस दौरान केंद्र समन्वयक प्रो.भूपेंद्र विक्रम सिंह, डॉ. नृपेंद्र प्रताप सिंह, प्रो. एके कौल, प्रो. टीपी सिंह, प्रो. राकेश रमन आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन