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90 फीसदी को नहीं मिला सौ दिन काम
Updated Sat, 20 Jan 2018 01:21 AM IST
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ज्ञानपुर। सरकारी मुलाजिमों की बेपरवाही से महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। हालत यह है कि न तो सरकार का लक्ष्य पूरा हो पा रहा है और न ही गरीबों, मजदूरों को रोजगार मिल रहा है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में जिले के 90 फीसदी परिवारों को 100 दिन काम नहीं मिल सका। 1.12 लाख पंजीकृत मजदूरों में सिर्फ नौ हजार के लिए 100 दिन रोजगार सृजित हो सका।
ग्रामीण अंचलों से मजदूरों का पलायन रोकने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना लागू की गई थी। गरीब परिवारों को 100 दिन काम इसका मुख्य उद्देश्य है। मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों को प्रतिदिन 175 रुपये मजदूरी देने का प्रावधान है। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो मनरेगा के तहत जिले के छह ब्लॉकों में 1.12 लाख जॉबकार्ड धारक पंजीकृत हैं। इस वित्तीय वर्ष में इनमें से सिर्फ नौ हजार परिवारों को मनरेगा के तहत 100 दिनों काम मिल पाया है। 90 फीसदी मजदूर को काम उपलब्ध कराने में विभाग नाकाम रहा है। ग्राम प्रधानों की मानें तो प्रशासन की मनमानी के चलते मनरेगा का काम प्रभावित होता है। कच्चे कार्यों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। डीघ प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष शंकराचारी ने कहा कि मनरेगा के कार्यों में अधिकारी परेशान करते हैं। वहीं, श्रमायुक्त मनरेगा अजीत सिंह ने कहा कि मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों की निगरानी होती है। फर्जी कार्य रोकने से यह आंकड़ा कम हो गया है।
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ग्रामीण अंचलों से मजदूरों का पलायन रोकने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना लागू की गई थी। गरीब परिवारों को 100 दिन काम इसका मुख्य उद्देश्य है। मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों को प्रतिदिन 175 रुपये मजदूरी देने का प्रावधान है। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो मनरेगा के तहत जिले के छह ब्लॉकों में 1.12 लाख जॉबकार्ड धारक पंजीकृत हैं। इस वित्तीय वर्ष में इनमें से सिर्फ नौ हजार परिवारों को मनरेगा के तहत 100 दिनों काम मिल पाया है। 90 फीसदी मजदूर को काम उपलब्ध कराने में विभाग नाकाम रहा है। ग्राम प्रधानों की मानें तो प्रशासन की मनमानी के चलते मनरेगा का काम प्रभावित होता है। कच्चे कार्यों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। डीघ प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष शंकराचारी ने कहा कि मनरेगा के कार्यों में अधिकारी परेशान करते हैं। वहीं, श्रमायुक्त मनरेगा अजीत सिंह ने कहा कि मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों की निगरानी होती है। फर्जी कार्य रोकने से यह आंकड़ा कम हो गया है।
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