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दो घंटे तक मचता रहा ताडंव, अंदर नहीं पहुंची पुलिस
Updated Thu, 21 Dec 2017 02:37 AM IST
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वाराणसी। मुट्ठी भर उपद्रवियों ने बीएचयू जैसे विशाल कैंपस में दो घंटे तक बेखौफ तांडव मचाया लेकिन उनसे कई गुना अधिक तादाद में पुलिस-पीएसी फोर्स और विश्वविद्यालय प्रशासन के सुरक्षाकर्मी। सिंहद्वार पर पुलिस-पीएसी बवाल शुरू होने से पहले ही मुस्तैद हो गई थी। लिहाजा, उपद्रवी छात्र चाहकर भी लंका चौराहे या फिर बाजार की तरफ जाने का साहस नहीं कर पाए और मेन गेट पर तोड़फोड़ करते हुए परिसर का रुख कर लिए। इसके बाद तो अराजकता और दहशत के बीच हर कोई बस यही चाह रहा था कि जल्द से जल्द पुलिस फोर्स कैंपस में दाखिल हो जाए और माहौल शांत हो जाए। लेकिन, सिंहद्वार पर शाम चार बजे से पहले से मुस्तैद फोर्स विश्वविद्यालय प्रशासन के बुलावे का इंतजार करती रह गई। एक ओर जहां उन्हें बुलावे का इंतजार था वहीं अंदर घटना को लेकर फंसे मरीजों-तीमारदारों, शिक्षकों, चिकित्सकों, कर्मचारियों और परीक्षा देने आए छात्र-छात्राओं को इस बात की कसक रही कि पुलिस कर्मी आखिर अंदर क्यों नहीं आ रहे...।
दरअसल, बीते 23 सितंबर की रात बीएचयू में बवाल के दौरान पुलिस ने एकबारगी स्थिति नियंत्रित कर ली थी लेकिन तब प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मियों ने वीसी लॉज के पास छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज कर माहौल को हिंसक बना दिया था। इसके बाद पुलिस पर भी छात्राओं को लाठी से पीटने के आरोप लगे। जब मामले की जांच शुरू हुई कि लाठीचार्ज का जिम्मेदार विश्वविद्यालय प्रशासन है या पुलिस तो उस समय भी सारा दोष पुलिस पर ही मढ़ने की कोशिश हुई थी। सूत्रों की माने तो उस मामले को लेकर ही पुलिस इस बार सबक लेती दिखी। विभागीय सूत्रों के मुताबिक बीएचयू गेट पर मौजूद पुलिस अधिकारियों को उच्चाधिकारियों का निर्देश था कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से लिखित या मौखिक मदद नहीं मांगी जाती या फिर कैंपस में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती, तब तक फोर्स परिसर में दाखिल नहीं होगी। हुआ भी यही, बीएचयू की ओर से कोई मदद नहीं मांगी गई और फोर्स गेट पर विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति का इंतजार करती रही।
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दरअसल, बीते 23 सितंबर की रात बीएचयू में बवाल के दौरान पुलिस ने एकबारगी स्थिति नियंत्रित कर ली थी लेकिन तब प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मियों ने वीसी लॉज के पास छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज कर माहौल को हिंसक बना दिया था। इसके बाद पुलिस पर भी छात्राओं को लाठी से पीटने के आरोप लगे। जब मामले की जांच शुरू हुई कि लाठीचार्ज का जिम्मेदार विश्वविद्यालय प्रशासन है या पुलिस तो उस समय भी सारा दोष पुलिस पर ही मढ़ने की कोशिश हुई थी। सूत्रों की माने तो उस मामले को लेकर ही पुलिस इस बार सबक लेती दिखी। विभागीय सूत्रों के मुताबिक बीएचयू गेट पर मौजूद पुलिस अधिकारियों को उच्चाधिकारियों का निर्देश था कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से लिखित या मौखिक मदद नहीं मांगी जाती या फिर कैंपस में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती, तब तक फोर्स परिसर में दाखिल नहीं होगी। हुआ भी यही, बीएचयू की ओर से कोई मदद नहीं मांगी गई और फोर्स गेट पर विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति का इंतजार करती रही।
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