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मार्बल कारोबारी ने एक करोड़ की अघोषित आय स्वीकारी
Updated Sat, 16 Sep 2017 02:07 AM IST
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वाराणसी। आयकर के अधिकारियों की पूछताछ में मार्बल कारोबारी ने एक करोड़ रुपये की अघोषित आय स्वीकार की है। गुरुवार को टीम ने कर चोरी, दस्तावेजों में छेड़छाड़ और रिटर्न में घालमेल करने के मामले में आरके मार्बल्स के प्रतिष्ठानों और गोदामों पर एक साथ सर्वे की कार्रवाई की थी।
आयकर की टीम ने गुरुवार को मार्बल कारोबारी के महमूरगंज, महेशपुर, चांदपुर, मुड़ैला, मंडुवाडीह और मोतीझील स्थित दुकानों और गोदामों पर एक साथ कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई से कर चोरी करने वाले व्यापारियों में हड़कंप मचा हुआ है। प्रधान आयकर आयुक्त सुनील माथुर ने बताया कि मार्बल कारोबारी ने पूछताछ के दौरान करीब एक करोड़ रुपये की अघोषित आय स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि सर्वे के दौरान कारोबारी के गोदाम में मौजूद स्टाक और रजिस्टर से मिलान करने पर अधिक की खरीद-फरोख्त की बात सामने आई है जबकि बही खाते में इसका कोई रिकार्ड नहीं था। कारोबारी ने नोटबंदी के समय भी करोड़ों की आय की थी।
उन्होंने बताया कि एक साल में चार एडवांस टैक्स जमा करने पड़ते हैं लेकिन कारोबारी कर चोरी के लिए साल के अंत में एक ही बार टैक्स अदा करता था। इससे कर चोरी की आशंका काफी बढ़ गई थी। सारे पहलुओं की जांच के बाद कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि ऐसे सभी कारोबारियों पर कार्रवाई की जाएगी, जो कर चोरी की नीयत से समय से टैक्स नहीं जमा करते। सर्वे की कार्रवाई अपर निदेशक आयकर अभय ठाकुर की अगुवाई में की गई। टीम में आयकर अधिकारी पीके श्रीवास्तव, एसके सिंह, हिमांशु कुमार, महेंद्र सिंह, अशोक कुमार यादव, राजकुमार सिंह, विश्वजीत मुखर्जी, धनंजय तिवारी, नवेंद्र भट्टाचार्य और जीके बरुआ शामिल थे।
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आयकर की टीम ने गुरुवार को मार्बल कारोबारी के महमूरगंज, महेशपुर, चांदपुर, मुड़ैला, मंडुवाडीह और मोतीझील स्थित दुकानों और गोदामों पर एक साथ कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई से कर चोरी करने वाले व्यापारियों में हड़कंप मचा हुआ है। प्रधान आयकर आयुक्त सुनील माथुर ने बताया कि मार्बल कारोबारी ने पूछताछ के दौरान करीब एक करोड़ रुपये की अघोषित आय स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि सर्वे के दौरान कारोबारी के गोदाम में मौजूद स्टाक और रजिस्टर से मिलान करने पर अधिक की खरीद-फरोख्त की बात सामने आई है जबकि बही खाते में इसका कोई रिकार्ड नहीं था। कारोबारी ने नोटबंदी के समय भी करोड़ों की आय की थी।
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उन्होंने बताया कि एक साल में चार एडवांस टैक्स जमा करने पड़ते हैं लेकिन कारोबारी कर चोरी के लिए साल के अंत में एक ही बार टैक्स अदा करता था। इससे कर चोरी की आशंका काफी बढ़ गई थी। सारे पहलुओं की जांच के बाद कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि ऐसे सभी कारोबारियों पर कार्रवाई की जाएगी, जो कर चोरी की नीयत से समय से टैक्स नहीं जमा करते। सर्वे की कार्रवाई अपर निदेशक आयकर अभय ठाकुर की अगुवाई में की गई। टीम में आयकर अधिकारी पीके श्रीवास्तव, एसके सिंह, हिमांशु कुमार, महेंद्र सिंह, अशोक कुमार यादव, राजकुमार सिंह, विश्वजीत मुखर्जी, धनंजय तिवारी, नवेंद्र भट्टाचार्य और जीके बरुआ शामिल थे।
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