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आदत बदलने को तैयार नहीं एआरटीओ के कर्मचारी
Updated Fri, 04 May 2018 12:32 AM IST
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ज्ञानपुर। एआरटीओ दफ्तर के कर्मचारी अपनी कार्यशैली में सुधार लाने का तैयार नहीं है। बृहस्पतिवार को भी ज्यादातर कर्मचारी रोज की तरह आधा-पौन घंटा की देरी से पहुंचे। इसके बाद भी जो कर्मचारी पहुंच गए, वे परिसर में टहल कर काफी देर तक खैनी रगड़ते दिखे। बड़ी संख्या में आवेदक बैठकर पटल खुलने का इंतजार करते रहे लेकिन 10:30 बजे तक ज्यादातर कमरों में ताले लटकते रहे। दलालों और आउटसाइडरों की भीड़ भी लगी रही। हालांकि एआरटीओ सत्येंद्र यादव सुबह 10.15 बजे पहुंच गए थे।
एआरटीओ विभाग के अधिकतर कार्यालय बृहस्पतिवार को भी अपने पुराने समय पर ही खुले। 10:30 बजे तक एआरटीओ दफ्तर के अलावा लगभग सभी केबिन में ताला लटकता रहा। गाड़ी का कागज बनवाने के लिए दूर-दराज से आए लोग कर्मचारियों की प्रतीक्षा में बैठे रहे।
सहायक संभागीय परिवहन विभाग में अमर उजाला के दूसरे दिन की पड़ताल में भी एआरटीओ के अलावा बाकी के कमरों में ताला लटकता मिला। ज्यादातर कर्मचारी विलंब से पहुुंचे। जो समय पर पहुंचे भी वह इधर-उधर के गप मारने में मशगूल रहे। ऐसा लगता है जैसे न तो उन्हें शासन-प्रशासन का डर है, ना ही अपने काम की फिक्र। बृहस्पतिवार को एआरटीओ सत्येंद्र कुुमार यादव 10.15 बजे अपने कक्ष में बैठ गए थे। लेकिन, बाकी के कर्मचारियों के कमरों में ताला लटक रहा था। इक्का-दुक्का कमरे खुले भी थे तो उसमें कर्मचारी नदारत थे। इस बीच 10:30 बजे अपने बंद कक्ष के बाहर खड़े प्रवर्तन कर्मचारी जयशंकर पांडेय और कनिष्ठ सहायक लिपिक एवं उर्दू अनुवादक अहमद रब्बानी खैनी रगड़ते दिखे। वहां काम के लिए पहुंचे लोगों ने बताया कि यहां कई कर्मचारी आने के घंटों बाद तक अपना कमरा बंद कर इधर से उधर करते रहते हैं। एआरटीओ ने कहा कि कुछ कर्मचारियों के समय पर अपने कक्ष में नहीं बैठने की शिकायत मिली है। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा।
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एआरटीओ विभाग के अधिकतर कार्यालय बृहस्पतिवार को भी अपने पुराने समय पर ही खुले। 10:30 बजे तक एआरटीओ दफ्तर के अलावा लगभग सभी केबिन में ताला लटकता रहा। गाड़ी का कागज बनवाने के लिए दूर-दराज से आए लोग कर्मचारियों की प्रतीक्षा में बैठे रहे।
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सहायक संभागीय परिवहन विभाग में अमर उजाला के दूसरे दिन की पड़ताल में भी एआरटीओ के अलावा बाकी के कमरों में ताला लटकता मिला। ज्यादातर कर्मचारी विलंब से पहुुंचे। जो समय पर पहुंचे भी वह इधर-उधर के गप मारने में मशगूल रहे। ऐसा लगता है जैसे न तो उन्हें शासन-प्रशासन का डर है, ना ही अपने काम की फिक्र। बृहस्पतिवार को एआरटीओ सत्येंद्र कुुमार यादव 10.15 बजे अपने कक्ष में बैठ गए थे। लेकिन, बाकी के कर्मचारियों के कमरों में ताला लटक रहा था। इक्का-दुक्का कमरे खुले भी थे तो उसमें कर्मचारी नदारत थे। इस बीच 10:30 बजे अपने बंद कक्ष के बाहर खड़े प्रवर्तन कर्मचारी जयशंकर पांडेय और कनिष्ठ सहायक लिपिक एवं उर्दू अनुवादक अहमद रब्बानी खैनी रगड़ते दिखे। वहां काम के लिए पहुंचे लोगों ने बताया कि यहां कई कर्मचारी आने के घंटों बाद तक अपना कमरा बंद कर इधर से उधर करते रहते हैं। एआरटीओ ने कहा कि कुछ कर्मचारियों के समय पर अपने कक्ष में नहीं बैठने की शिकायत मिली है। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा।
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