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एयरपोर्ट पर इलाज के अभाव में चालक की मौत
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बाबतपुर। वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर मंगलवार को विमान यात्री को लेने पहुंचे चालक को हार्ट अटैक हो गया। इलाज के अभाव में उसकी मौत हो गई।
आजमगढ़ के क्रिश्चियन हॉस्पिटल के चिकित्सक का पुत्र शौर्य अपने चालक जयप्रकाश के साथ बहन डॉ. गरिमा सिंह को लेने एयरपोर्ट पहुंचा था। इस बीच चालक जयप्रकाश गौड़ (52) वाशरूम गया और वहीं गिरकर तड़पने लगा। आसपास खड़े लोगों ने इसकी सूचना सीआईएसएफ जवानों को दी। तत्काल उसे उठा कर टर्मिनल बिल्डिंग स्थित एमआई रूम ले गए लेकिन वहां प्राथमिक उपचार की कोई सुविधा न मिलने और न ही किसी डॉक्टर के तैनात होने के चलते एंबुलेंस को फ ोन किया गया। काफी इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची तो वहां मौजूद अथारिटी कर्मी शिवनाथ ने अपने निजी वाहन से बाबतपुर स्थित एक निजी अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
चाहकर भी नहीं कर सकी मदद
डॉ. गरिमा सिंह भी पेशे से चिकित्सक हैं। चालक की जान बचाने के लिए उन्होंने भी प्रयास किया। एमआई रूम में कोई व्यवस्था न होने के कारण वो चाहकर भी कुछ खास मदद नहीं कर सकीं। इस बात के लिए वो एयरपोर्ट प्रशासन को कोसती रहीं।
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चिकित्सक होता तो बच सकती थी जान
मौके पर मौजूद रहे यात्रियों व अन्य स्टॉफ यहीं कहते सुने गए कि अगर यहां किसी चिकित्सक की तैनाती होती तो चालक की जान बच जाती। एयरपोर्ट टर्मिनल भवन के अंदर हेरिटेज हॉस्पिटल की ओर से संचालित एक एमआई (मेडिकल इमरजेंसी) रूम है, जिसमें एक डॉक्टर और एक कंपाउंडर की तैनाती थी। लगभग एक वर्ष पूर्व एक मामले में डॉक्टर जेल चला गया। तब से यह एमआई रूम एक कंपाउंडर वीरेंद्र के भरोसे चल रहा है। एक वर्ष बीत जाने के बाद भी किसी डॉक्टर की तैनाती नहीं हो सकी।
एयरपोर्ट पर कार चालक की मौत का जोडस़से पहले भी बैंकाक से दिल्ली जा रहे थाईलैंड निवासी एटावट थांग कसोर्न (53) की तबीयत बिगड़ गई। वाराणसी एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई पर एयरपोर्ट पर कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। यात्री को आनन-फानन में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डाक्टराें ने उसे मृत घोषित कर दिया गया था। चालक की मौत के मामले में जब एयरपोर्ट निदेशक एके राय से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नहीं उठा।
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आजमगढ़ के क्रिश्चियन हॉस्पिटल के चिकित्सक का पुत्र शौर्य अपने चालक जयप्रकाश के साथ बहन डॉ. गरिमा सिंह को लेने एयरपोर्ट पहुंचा था। इस बीच चालक जयप्रकाश गौड़ (52) वाशरूम गया और वहीं गिरकर तड़पने लगा। आसपास खड़े लोगों ने इसकी सूचना सीआईएसएफ जवानों को दी। तत्काल उसे उठा कर टर्मिनल बिल्डिंग स्थित एमआई रूम ले गए लेकिन वहां प्राथमिक उपचार की कोई सुविधा न मिलने और न ही किसी डॉक्टर के तैनात होने के चलते एंबुलेंस को फ ोन किया गया। काफी इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची तो वहां मौजूद अथारिटी कर्मी शिवनाथ ने अपने निजी वाहन से बाबतपुर स्थित एक निजी अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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चाहकर भी नहीं कर सकी मदद
डॉ. गरिमा सिंह भी पेशे से चिकित्सक हैं। चालक की जान बचाने के लिए उन्होंने भी प्रयास किया। एमआई रूम में कोई व्यवस्था न होने के कारण वो चाहकर भी कुछ खास मदद नहीं कर सकीं। इस बात के लिए वो एयरपोर्ट प्रशासन को कोसती रहीं।
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चिकित्सक होता तो बच सकती थी जान
मौके पर मौजूद रहे यात्रियों व अन्य स्टॉफ यहीं कहते सुने गए कि अगर यहां किसी चिकित्सक की तैनाती होती तो चालक की जान बच जाती। एयरपोर्ट टर्मिनल भवन के अंदर हेरिटेज हॉस्पिटल की ओर से संचालित एक एमआई (मेडिकल इमरजेंसी) रूम है, जिसमें एक डॉक्टर और एक कंपाउंडर की तैनाती थी। लगभग एक वर्ष पूर्व एक मामले में डॉक्टर जेल चला गया। तब से यह एमआई रूम एक कंपाउंडर वीरेंद्र के भरोसे चल रहा है। एक वर्ष बीत जाने के बाद भी किसी डॉक्टर की तैनाती नहीं हो सकी।
एयरपोर्ट पर कार चालक की मौत का जोडस़से पहले भी बैंकाक से दिल्ली जा रहे थाईलैंड निवासी एटावट थांग कसोर्न (53) की तबीयत बिगड़ गई। वाराणसी एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई पर एयरपोर्ट पर कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। यात्री को आनन-फानन में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डाक्टराें ने उसे मृत घोषित कर दिया गया था। चालक की मौत के मामले में जब एयरपोर्ट निदेशक एके राय से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नहीं उठा।