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पद्मश्री: दिग्गजों को मिला मान, युवाओं को नई पहचान

Sat, 26 Jan 2019 01:50 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 26 Jan 2019 01:50 AM IST
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पद्मश्री: दिग्गजों को मिला मान, युवाओं को नई पहचान
वाराणसी। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को पद्म पुरस्कारों की घोषणा होते ही काशीवासी खुशी से झूम उठे। पद्म पुरस्कारों की घोषणा में मोदी सरकार बनारस पर एक बार फिर मेहरबान रही। काशी की चार हस्तियों को पद्मश्री पुरस्कारों को लिए चयनित किया गया है। इनमें संगीत जगत की दो शख्सियत डॉ. राजेश्वर आचार्य और लोक गायक हीरालाल यादव के अलावा समाज सेवा के क्षेत्र से जीआई विशेषज्ञ डॉ. रजनीकांत और अंतरराष्ट्रीय बास्केटबाल खिलाड़ी प्रशांति सिंह के नाम शामिल है। डॉ. आचार्य और हीरालाल की लोकप्रियता को अरसे बाद मान दिया गया है, जबकि डॉ. रजनीकांत और प्रशांति सिंह के कार्यों को इस पुरस्कार से नई पहचान मिली है।ब्यूरो
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डॉ. राजेश्वर आचार्य : सुर-संगीत के साधक
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट्स और संगीत विभाग के विभागाध्यक्ष रहे डॉ. राजेश्वर आचार्य को 1966 में आल इंडिया रेडियो म्यूजिक कंपटीशन में पहला स्थान मिला था। ग्वालियर घराना से ताल्लुक रखने वाले संकट मोचन फाउंडेशन के साथ मिलकर ध्रुपद मेले का आयोजन शुरू कराया।
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भैंसासुर घाट पर शुक्रवार शाम ख्याल गायक और संगीतज्ञ डॉ. राजेश्वर आचार्य के सुर गंगा मुक्ताकाशीय मंच से अपनी प्रस्तुति देकर नीचे उतरने के कुछ ही देर बाद उन्हें पद्मश्री अलंकरण से सम्मानित किए जाने की जानकारी हुई। अब दुर्लभ हो रहे वाद्य यंत्र जलतरंग के इकलौते साधक डॉ. आचार्य का ध्रुपद गायकी में भी कोई सानी नहीं है। वह पं. ओंकारनाथ ठाकुर की परंपरा के संगीताचार्य हैं। तुलसी घाट पर ध्रुपद मेले की आयोजन समिति के संस्थापक सदस्य के तौर पर इसको पुनर्जीवित कर दिया। डॉ. आचार्य ने कहा कि यह सम्मान बाबा विश्वनाथ को समर्पित है। अधिकारी तो वही है, हम लोग तो केवल पात्र हैं। हमारी तो इच्छा बस इतनी है कि संगीत की जीवन पर्यंत सेवा करते रहें।
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हीरालाल यादव : लोक गायकी का सम्मान
होरी खलीफा और गाटर खलीफा के शिष्य श्री गुरु रम्मन दास अखाड़े से जुड़े हीरालाल ने पांच वर्ष की उम्र से बिरहा गायन शुरू कर दिया था। काशी रत्न और मंजुश्री से अलंकृत 82 वर्षीय हीरालाल (नेताजी) ने सात दशक से ज्यादा समय तक संगीत की सेवा कर दर्जनों लोक गायकों की पीढ़ी तैयार की।
सूचना मिलने पर बुजुर्ग प्रख्यात लोक गायक हीरालाल यादव ने गुनगुनाया... आजाद वतन भारत की धरा हरदम कुर्बानी मांगेले... बुड्ढों से सबक, अनुभव मांगे और जवानों से जवानी मांगेले... महिला टोली से बार-बार झांसी वाली रानी मांगेले...। चौकाघाट स्थित आवास पर अस्वस्थ होने के कारण लेटे हीरालाल पुरस्कार की घोषणा की जानकारी पाकर उठ कर बैठ गए। उनके बेटे रामजी और भगत की आंखों से आंसू छलक पड़े। रामजी ने कहा, बाऊ की तमन्ना मोदी जी ने पूरी कर दी। 1950 के दशक से पूर्वांचल में लोक गायकी में हीरा और बुल्लू की जोड़ी चर्चित रही। हीरालाल की गायकी में शास्त्रीय संगीत का पुट है। लोक गायक डॉ. मन्नू यादव ने इस पर प्रसन्नता जताई।
डॉ. रजनीकांत : बौद्धिक संपदा के रक्षक
प्रदेश सरकार की एक जिला एक उत्पाद को प्रोत्साहन देने की योजना के पीछे डॉ. रजनीकांत का दिमाग और उनकी मेहनत मानी जाती है। अब तक नौ उत्पादों का जीआई पंजीयन कराया और सात उत्पाद पंजीयन की प्रक्रिया में हैं। 2017 में बौद्धिक संपदा पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
बीते 25 वर्षों से बुनकरों, शिल्पियों, भूमिहीन महिलाओं और बच्चों की शिक्षा के साथ ही बौद्धिक संपदा अधिकार के क्षेत्र में काम कर रहे सारनाथ के मवइयां में रहने वाले डॉ. रजनीकांत मूल रूप से मिर्जापुर जिले के चुनार थाना के जलालपुरमाफी गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से शिल्पकारों को आर्थिक रूप से सबल बनाने में अहम भूमिका निभाई। साथ ही बनारस और आसपास के शिल्प उत्पादों को जीआई के तहत पेटेंट कराया। डॉ. रजनीकांत ने कहा कि यह पुरस्कार बनारस सहित पूर्वांचल के शिल्पियों, बुनकरों और भूमिहीन महिलाओं को समर्पित है। इस पुरस्कार ने समाज हित में अब और ज्यादा बेहतर करने की जिम्मेदारी बढ़ा दी है।
प्रशांति सिंह : खिलाड़ी बिटिया का मान
भारतीय बास्केटबाल टीम की पूर्व कप्तान प्रशांति सिंह 2002 में राष्ट्रीय टीम से जुड़ीं। प्रशांति एशियन चैंपियनशिप और कामनवेल्थ सहित दो दर्जन से अधिक अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। प्रशांति को अब तक 30 से अधिक पदक और सम्मान मिल चुके हैं।

बास्केटबाल की दुनिया में सिंह सिस्टर्स के नाम से मशहूर पांच बहनों में तीसरे नंबर की प्रशांति सिंह को पिछले साल अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया था। शिवपुर निवासी प्रशांति सिंह बास्केटबाल की पहली खिलाड़ी हैं, जिन्हें पदमश्री सम्मान मिला है। पुरस्कार पर खुशी जताते हुए प्रशांति ने कहा कि पद्म पुरस्कार मिलने से और बेहतर करने की प्रेरणा मिलेगी। हमने कभी नहीं सोचा था कि खेल के बूते हमें नागरिक पुरस्कार से सम्मानित होने का अवसर मिलेगा। बचपन के दोस्त हमेशा कहते थे कि एक दिन तुमको जरूर पद्मश्री मिलेगा। आज उनकी बात सच साबित हो गई। यह पुरस्कार मेरे मां-बाप, भाई, बहनों, गुरुजनों, कोच और सभी शुभचिंतकों को समर्पित है। कहा-मुझे हमेशा नंबर एक पर रहना पसंद था।
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