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आठ दिन बाद गंगा में चलीं नावें
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वाराणसी। आखिर शनिवार को नाविकों की हड़ताल प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद समाप्त हो गई। दिन में चली वार्ता के बाद शाम को अधिकारियों ने क्रूज को अस्सी घाट से शिफ्ट करके सामने घाट करने का लिखित आश्वासन दिया तब जाकर आंदोलन समाप्त हुआ।
गंगा में क्रूज संचालन की सरकार की नीति को अपनी रोजी रोटी के लिए संकट बताते हुए नाविक आठ दिन से हड़ताल पर थे। इस वजह से नए साल पर भी उन्होंने गंगा में नावें नहीं चलाईं। शनिवार दोपहर में एडीएम सिटी विनय कुमार और एसपी सिटी दिनेश सिंह दशाश्वमेध घाट पहुंचे। उन्होंने कहा कि हम लोग आश्वासन दे रहे हैं नाविकों की समस्याएं दूर कर दी जाएंगी। इस पर समस्त निषाद समाज का नेतृत्व कर रहे शिवाला के प्रमोद मांझी ने वार्ता के दौरान अधिकारियों से कहा कि आप हमें लिखित आश्वासन दें। इसके बाद अधिकारी वापस चले गए। शाम को सभी नाविक फिर से अस्सी घाट पहुंचे। जहां पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि घाट बनने के बाद क्रूज को सामने घाट से संचालित कराया जाएगा, तब जाकर मामला शांत हुआ। नाविकों ने प्रशासन का धन्यवाद देते हुए संचालन शुरू कर दिया।
प्रमोद मांझी ने कहा कि हम लोग गरीब आदमी हैं। हमें नेतागिरी से कोई मतलब नहीं है। हम लोगों की जो दो जून की रोटी चलती रहे, बस यही चाहते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में मांझी समाज के लोग उपस्थित रहे।
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गंगा में क्रूज संचालन की सरकार की नीति को अपनी रोजी रोटी के लिए संकट बताते हुए नाविक आठ दिन से हड़ताल पर थे। इस वजह से नए साल पर भी उन्होंने गंगा में नावें नहीं चलाईं। शनिवार दोपहर में एडीएम सिटी विनय कुमार और एसपी सिटी दिनेश सिंह दशाश्वमेध घाट पहुंचे। उन्होंने कहा कि हम लोग आश्वासन दे रहे हैं नाविकों की समस्याएं दूर कर दी जाएंगी। इस पर समस्त निषाद समाज का नेतृत्व कर रहे शिवाला के प्रमोद मांझी ने वार्ता के दौरान अधिकारियों से कहा कि आप हमें लिखित आश्वासन दें। इसके बाद अधिकारी वापस चले गए। शाम को सभी नाविक फिर से अस्सी घाट पहुंचे। जहां पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि घाट बनने के बाद क्रूज को सामने घाट से संचालित कराया जाएगा, तब जाकर मामला शांत हुआ। नाविकों ने प्रशासन का धन्यवाद देते हुए संचालन शुरू कर दिया।
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प्रमोद मांझी ने कहा कि हम लोग गरीब आदमी हैं। हमें नेतागिरी से कोई मतलब नहीं है। हम लोगों की जो दो जून की रोटी चलती रहे, बस यही चाहते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में मांझी समाज के लोग उपस्थित रहे।
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