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किसानों के मुद्दों पर ऐसी लापरवाही
Updated Wed, 13 Jun 2018 12:28 AM IST
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ज्ञानपुर। केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों के मुद्दे को लेकर भले संजीदा हैं लेकिन जिले के अफसर और माननीय उदासीन बने हुए हैं। इसकी एक बानगी मंगलवार को जिला पंचायत सभागार में देखने को मिली। जनपदीय सिंचाई बंधु समिति की बैठक में अध्यक्ष और दो विभागों के अधिकारियों केे अलावा कोई नहीं पहुंचा। कागजी कोरम पूरा करने के बाद बैठक खत्म कर दी गई। एक-दो बार नहीं, पिछली 24 बैठकों में भी यही हुआ है।
जिला पंचायत सभागार में सुबह 11 बजे से सिंचाई बंधु की बैठक बुलाई गई थी। सिंचाई बंधु समिति के अध्यक्ष पुरुषोत्तम पांडेय तय समय पर पहुंच गए। उनके साथ नहर विभाग के एक्सईएन और नलकूप विभाग के जेई भी पहुंचे लेकिन दूसरे विभागों के अफसर नदारद रहे। दोपहर 12 बजे तक सभी विभागों के अधिकारियों और माननीयों का इंतजार किया, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। उसके बाद कागजी कोरम पूरा कर अपराह्न एक बजे तक बैठक खत्म कर दी गई। समिति के अध्यक्ष ने कहा कि किसानों की सिंचाई से जुड़ी समस्याओं के निराकरण के लिए हर महीने दूसरे मंगलवार को सिंचाई बंधु की बैठक होती है। बैठक में सांसद, विधायक, एमएलसी, ब्लॉक प्रमुख, डीएम, सीडीओ समेत 31 अधिकारियों को आना चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछली 24 बैठकों में भी अधिकारियों और माननीयों की उपस्थिति का यही हाल रहा है। ऐसे में बैठक सिर्फ खानापूर्ति होकर रह जाती है। उन्होंने बताया कि सभी विभागों को पत्र भी जारी किया जाता है, इसके बाद भी कोई बैठक में नहीं आता।
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जिला पंचायत सभागार में सुबह 11 बजे से सिंचाई बंधु की बैठक बुलाई गई थी। सिंचाई बंधु समिति के अध्यक्ष पुरुषोत्तम पांडेय तय समय पर पहुंच गए। उनके साथ नहर विभाग के एक्सईएन और नलकूप विभाग के जेई भी पहुंचे लेकिन दूसरे विभागों के अफसर नदारद रहे। दोपहर 12 बजे तक सभी विभागों के अधिकारियों और माननीयों का इंतजार किया, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। उसके बाद कागजी कोरम पूरा कर अपराह्न एक बजे तक बैठक खत्म कर दी गई। समिति के अध्यक्ष ने कहा कि किसानों की सिंचाई से जुड़ी समस्याओं के निराकरण के लिए हर महीने दूसरे मंगलवार को सिंचाई बंधु की बैठक होती है। बैठक में सांसद, विधायक, एमएलसी, ब्लॉक प्रमुख, डीएम, सीडीओ समेत 31 अधिकारियों को आना चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछली 24 बैठकों में भी अधिकारियों और माननीयों की उपस्थिति का यही हाल रहा है। ऐसे में बैठक सिर्फ खानापूर्ति होकर रह जाती है। उन्होंने बताया कि सभी विभागों को पत्र भी जारी किया जाता है, इसके बाद भी कोई बैठक में नहीं आता।
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