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नारी शिक्षा से राष्ट्र को मिलेगी मजबूती
Updated Sun, 08 Apr 2018 01:24 AM IST
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भदोही। सत्संग से आध्यात्मिक सोच विकसित होती है। मन में धार्मिक भावनाओं को संस्कारिक वातावरण प्राप्त होता है। राष्ट्रीय एकता में पारिवारिक एकता महत्वपूर्ण स्थान रखती है, जो परस्पर प्रेम पर निर्भर है। शनिवार को रजपुरा में आयोजित क्षेत्रीय निरंकारी महिला संत समागम में केंद्रीय प्रचारिका बहन अमृत कौर ने ये बातें कहीं।
कानपुर से पधारीं निरंकारी मंडल की केंद्रीय प्रचारिका ने कहा कि नारी शक्ति राष्ट्र शक्ति है। नारी पर अत्याचार से भगवान को भी क्रोध आता है और वह अत्याचारी का समूल नाश करता है। नारी न होती तो संसार का अस्तित्व न होता। जिस देश ने तरक्की की समझो, उस देश की माताएं जागरूक और शिक्षित हैं। आज देश जिस दिशा में अग्रसर है, उससे स्पष्ट है कि यहां सत्संग की जरूरत है।
बताया कि राष्ट्रीय एकता और देश की समृद्धि के लिए परिवारिक एकता महत्वपूर्ण है। परिवार एक इकाई है। शाम को थका-हारा इंसान घर आता है और घर का वातावरण अच्छा मिलने पर वह प्रसन्न हो जाता है। थकान गायब हो जाती है और सभी के चेहरों पर मुस्कान दौड़ जाती है। अनुकूल वातावरण न मिलने पर इंसान टूट जाता है। जहां दूषित वातावरण है, वहां केवल दु:ख, कंगाली और संकट का बोलबाला है। समागम में इलाहाबाद की सत्संग प्रभारी कुमुद, कमला खरबंदा, सीमा सचदेव, रीटा, मीना शुक्ला, शैलबाला, शोभा, संजू, कविता और समला आदि ने भी विचार व्यक्त किए। संयोजक राजेश कुमार व महिला संत समागम प्रभारी नीलम सचदेव, डॉ. राजेश कुमार आदि ने व्यवस्था संभाली। समागम में चार जनपदों की हजारों महिलाओं ने भागीदारी की। प्रतापगढ़, भदोही, इलाहाबाद और कौशांबी जनपद की महिलाओं का सुबह से ही आगमन शुरू हो गया था।
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कानपुर से पधारीं निरंकारी मंडल की केंद्रीय प्रचारिका ने कहा कि नारी शक्ति राष्ट्र शक्ति है। नारी पर अत्याचार से भगवान को भी क्रोध आता है और वह अत्याचारी का समूल नाश करता है। नारी न होती तो संसार का अस्तित्व न होता। जिस देश ने तरक्की की समझो, उस देश की माताएं जागरूक और शिक्षित हैं। आज देश जिस दिशा में अग्रसर है, उससे स्पष्ट है कि यहां सत्संग की जरूरत है।
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बताया कि राष्ट्रीय एकता और देश की समृद्धि के लिए परिवारिक एकता महत्वपूर्ण है। परिवार एक इकाई है। शाम को थका-हारा इंसान घर आता है और घर का वातावरण अच्छा मिलने पर वह प्रसन्न हो जाता है। थकान गायब हो जाती है और सभी के चेहरों पर मुस्कान दौड़ जाती है। अनुकूल वातावरण न मिलने पर इंसान टूट जाता है। जहां दूषित वातावरण है, वहां केवल दु:ख, कंगाली और संकट का बोलबाला है। समागम में इलाहाबाद की सत्संग प्रभारी कुमुद, कमला खरबंदा, सीमा सचदेव, रीटा, मीना शुक्ला, शैलबाला, शोभा, संजू, कविता और समला आदि ने भी विचार व्यक्त किए। संयोजक राजेश कुमार व महिला संत समागम प्रभारी नीलम सचदेव, डॉ. राजेश कुमार आदि ने व्यवस्था संभाली। समागम में चार जनपदों की हजारों महिलाओं ने भागीदारी की। प्रतापगढ़, भदोही, इलाहाबाद और कौशांबी जनपद की महिलाओं का सुबह से ही आगमन शुरू हो गया था।
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