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इलाज के साथ समाजसेवा का जुनून
Updated Fri, 23 Mar 2018 01:07 AM IST
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लालानगर। कहते हैं कि अगर मन में कुछ ठान लो तो हर मुश्किल आसान होती जाती है। समाज के लिए कुछ करने का जज्बा हो तो कोई भी काम कठिन नहीं हो लगता। ऐसी ही मिसाल पेश कर रही हैं डॉ. एनी अख्तर। वह मरीजों के इलाज के साथ गरीब बच्चों के जीवन में शिक्षा की रोशनी फैला रही हैं।
गरीब छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा मिल सके, जिससे उनको मुकाम हासिल हो सके। वे गांव, क्षेत्र का नाम रोशन कर सकें। इसी मकसद से छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क कोचिंग देने में जुटी हुईं है गोपीगंज नगर निवासी प्रमुख समाजसेवी सेराज अख्तर की पुत्री डॉ. एनी अख्तर। सामाजिक सरोकार से ताल्लुक रखने वाले सेराज के परिवार में जन्मी एनी के मन में समाजसेवा की भावना बचपन से ही पल रही थी। 12वीं तक की पढ़ाई सेंट थॉमस स्कूल गोपीगंज में हुई। यहां अव्वल स्थान हासिल करने के बाद उसे एमबीबीएस कोर्स मेें दाखिला मिला। कई कॉलेज आवंटित हुए, किंतु घर के नजदीक होने के चलते इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। इसके बाद भी वह कठिन परिश्रम कर ऐसे छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क कोचिंग देती रहीं। आर्थिक तंगी के चलते अच्छे संस्थानों में दाखिला नहीं पा सकने वाले छात्र-छात्राओं को उन्होंने चुना। डॉ. एनी अख्तर नगर के कई स्थानों पर गरीब छात्र-छात्राओं को कोचिंग देती हैं। जब भी वह घर पर रहती हैं तो छात्र-छात्राओं को कोचिंग देने में जुटी रहती हैं। पिता सेराज अख्तर और परिवार के लोग उसको इस कार्य लिए प्रोत्साहित करते रहते हैं। अब एनी स्वरूप रानी मंडलीय अस्पताल इलाहाबाद में रेजिडेंट डाक्टर के तौर पर नियुक्त हो गईं हैं। इसके बाद भी बच्चों को तालीम देने की उनकी रचि कम नहीं हुई है।
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गरीब छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा मिल सके, जिससे उनको मुकाम हासिल हो सके। वे गांव, क्षेत्र का नाम रोशन कर सकें। इसी मकसद से छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क कोचिंग देने में जुटी हुईं है गोपीगंज नगर निवासी प्रमुख समाजसेवी सेराज अख्तर की पुत्री डॉ. एनी अख्तर। सामाजिक सरोकार से ताल्लुक रखने वाले सेराज के परिवार में जन्मी एनी के मन में समाजसेवा की भावना बचपन से ही पल रही थी। 12वीं तक की पढ़ाई सेंट थॉमस स्कूल गोपीगंज में हुई। यहां अव्वल स्थान हासिल करने के बाद उसे एमबीबीएस कोर्स मेें दाखिला मिला। कई कॉलेज आवंटित हुए, किंतु घर के नजदीक होने के चलते इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। इसके बाद भी वह कठिन परिश्रम कर ऐसे छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क कोचिंग देती रहीं। आर्थिक तंगी के चलते अच्छे संस्थानों में दाखिला नहीं पा सकने वाले छात्र-छात्राओं को उन्होंने चुना। डॉ. एनी अख्तर नगर के कई स्थानों पर गरीब छात्र-छात्राओं को कोचिंग देती हैं। जब भी वह घर पर रहती हैं तो छात्र-छात्राओं को कोचिंग देने में जुटी रहती हैं। पिता सेराज अख्तर और परिवार के लोग उसको इस कार्य लिए प्रोत्साहित करते रहते हैं। अब एनी स्वरूप रानी मंडलीय अस्पताल इलाहाबाद में रेजिडेंट डाक्टर के तौर पर नियुक्त हो गईं हैं। इसके बाद भी बच्चों को तालीम देने की उनकी रचि कम नहीं हुई है।
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