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श के मुख्य आर्थिक सलाहकर प्रो. अरविंद सुब्रमण्यम बोले
Updated Mon, 19 Mar 2018 02:24 AM IST
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वाराणसी। देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार प्रो. अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा कि जीएसटी आने वाले दिनों में आर्थिक विकास का एक बेहतरीन मॉडल बनेगा। क्योंकि इसके लागू होने से केंद्र और राज्य सरकार एक साथ कर निर्धारण और नीति नियोजन करने में समर्थ होंगे। बीएचयू अर्थशास्त्र विभाग में आयोजित तीन दिवसीय इंटरनेशनल सेमीनार के समापन समारोह में भाग लेने आए प्रो. सुब्रमण्यम ने ये बातें कहीं।
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने इससे पहले सेमीनार में आर्थिक विकास के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने प्रतिभागियों के साथ ही छात्र-छात्राओं के सवालों का जवाब भी दिया। कहा कि जीएसटी के पहले केंद्र और राज्य कर और कृषि को लेकर एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ते थे। भारत की चुनौती शिक्षा और स्वास्थ्य है। इस क्षेत्र में बुनियादी सुधार करने में अब तक असमर्थ रहे हैं। प्रो. सुब्रमण्यम ने स्वीकारा कि शिक्षा की गुणवत्ता और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए सरकार को साहसिक कदम उठाने की जरूरत है, जिससे कि मानवीय संसाधन उत्पादक हो सके। पिछले 25 साल में आर्थिक सुधार की आलोचना पर एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत की तुलना अन्य देशों से नहीं की जा सकती है। क्योंकि देश में लोकतंत्र और आर्थिक नीति का प्रवेश एक साथ हुआ। यही कारण है कि विकास की गति धीमी है। इसकी तुलना में चीन में आज भी लोकतंत्र नहीं है, इसलिए वहां विकास संभव हो सका। उत्तर प्रदेश में शिक्षा का सेलेबस अन्य विकसित प्रदेशों से पीछे हैं, इसमें सुधार की जरूरत है।
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मुख्य आर्थिक सलाहकार ने इससे पहले सेमीनार में आर्थिक विकास के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने प्रतिभागियों के साथ ही छात्र-छात्राओं के सवालों का जवाब भी दिया। कहा कि जीएसटी के पहले केंद्र और राज्य कर और कृषि को लेकर एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ते थे। भारत की चुनौती शिक्षा और स्वास्थ्य है। इस क्षेत्र में बुनियादी सुधार करने में अब तक असमर्थ रहे हैं। प्रो. सुब्रमण्यम ने स्वीकारा कि शिक्षा की गुणवत्ता और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए सरकार को साहसिक कदम उठाने की जरूरत है, जिससे कि मानवीय संसाधन उत्पादक हो सके। पिछले 25 साल में आर्थिक सुधार की आलोचना पर एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत की तुलना अन्य देशों से नहीं की जा सकती है। क्योंकि देश में लोकतंत्र और आर्थिक नीति का प्रवेश एक साथ हुआ। यही कारण है कि विकास की गति धीमी है। इसकी तुलना में चीन में आज भी लोकतंत्र नहीं है, इसलिए वहां विकास संभव हो सका। उत्तर प्रदेश में शिक्षा का सेलेबस अन्य विकसित प्रदेशों से पीछे हैं, इसमें सुधार की जरूरत है।
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