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भीटे की जमीन के नामांतण का आदेश
Updated Sun, 04 Mar 2018 01:12 AM IST
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सेवापुरी। विकास खंड क्षेत्र के कलिका बाजार में भूमाफिया ने फर्जी ढंग से तालाब, भीटे व गड़हे की भूमि पर खतौनी में अपना नाम दर्ज करवाकर कब्जा कर लिया था। इस मामले में एसडीएम राजातालाब ईशा दुहन ने तहसीलदार राजातालाब ओमप्रकाश श्रीवास्तव की जांच रिपोर्ट के आधार पर खतौनी से फर्जी नामांतरण को निरस्त करने का आदेश दिया है। एसडीएम ने यह भी आदेश दिया है कि समतल किए गए भीटे को पूर्व की भांति करवाकर पंद्रह दिन के अंदर आख्या प्रस्तुत करें। तालाब, भीटे व गड़हे की भूमि पर पर फर्जी नामांतरण व कब्जे की खबर को अमर उजाला ने 21 सितंबर 17 व हाईकोर्ट की खबर को 25 अक्टूबर 17 के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
इस मामले में हाईकोर्ट के अधिवक्ता अग्निहोत्री त्रिपाठी ने बालमुकुंद सिंह की ओर से एक जनहित याचिका उच्च न्यायालय में दाखिल किया था। जिस पर न्यायालय ने चार माह में जिला प्रशासन को कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इस बारे में तहसीलदार राजातालाब ने 13 अक्टूबर 17 व 20 नवंबर 17 को एसडीएम राजातालाब ईशा दुहन को इस आशय का कार्रवाई के लिए संस्तुति रिपोर्ट प्रेषित किया था कि कलिका बाजार स्थित खाता संख्या 24 व खाता संख्या 27 का आराजी नंबर 22, 25, 26, 31, 32, 33, 47 तालाब भीटा व गड़हा के रूप में खतौनी में दर्ज है। जिस पर काश्तकारों का अधिकार नहीं बनता है। एसडीएम ने तहसीलदार की रिपोर्ट के बाद यह निर्णय लिया कि काश्तकारों द्वारा तालाब भीटा व गड़हा पर फर्जी नामांतरण कराया गया है। एसडीएम ने 1 मार्च 18 को उपरोक्त सभी काश्तकारों का नाम निरस्त करने का आदेश दिया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि नायब तहसीलदार समतल कराऐ गए भीटे को पूर्व की भांति कराकर अवगत कराएं। एसडीएम की इस कार्रवाई से लगभग 09 बीघे भूमि अपने पुराने वजूद में आ जाएगी। तहसीलदार राजातालाब ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि जांच के बाद खतौनी में फर्जी नामांतरण को निरस्त करने की रिपोर्ट दी गई थी।
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इस मामले में हाईकोर्ट के अधिवक्ता अग्निहोत्री त्रिपाठी ने बालमुकुंद सिंह की ओर से एक जनहित याचिका उच्च न्यायालय में दाखिल किया था। जिस पर न्यायालय ने चार माह में जिला प्रशासन को कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इस बारे में तहसीलदार राजातालाब ने 13 अक्टूबर 17 व 20 नवंबर 17 को एसडीएम राजातालाब ईशा दुहन को इस आशय का कार्रवाई के लिए संस्तुति रिपोर्ट प्रेषित किया था कि कलिका बाजार स्थित खाता संख्या 24 व खाता संख्या 27 का आराजी नंबर 22, 25, 26, 31, 32, 33, 47 तालाब भीटा व गड़हा के रूप में खतौनी में दर्ज है। जिस पर काश्तकारों का अधिकार नहीं बनता है। एसडीएम ने तहसीलदार की रिपोर्ट के बाद यह निर्णय लिया कि काश्तकारों द्वारा तालाब भीटा व गड़हा पर फर्जी नामांतरण कराया गया है। एसडीएम ने 1 मार्च 18 को उपरोक्त सभी काश्तकारों का नाम निरस्त करने का आदेश दिया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि नायब तहसीलदार समतल कराऐ गए भीटे को पूर्व की भांति कराकर अवगत कराएं। एसडीएम की इस कार्रवाई से लगभग 09 बीघे भूमि अपने पुराने वजूद में आ जाएगी। तहसीलदार राजातालाब ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि जांच के बाद खतौनी में फर्जी नामांतरण को निरस्त करने की रिपोर्ट दी गई थी।
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