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पेयजल और सीवर व्यवस्था पर खर्च होंगे 165 करोड़
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शहर में प्रकाश की बेहतर व्यवस्था के लिए नगर निगम ने सार्वजनिक प्रकाश के मद में 10 गुना इजाफा किया है। वाहनों पर खर्च होने वाले आठ करोड़ के बजट में तीन करोड़ रुपये की कटौती की है। सीवर व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बजट को दोगुना किया गया है। इसके अलावा आए दिन सड़क धंसने की समस्या से निजात दिलाने के लिए अलग मद की व्यवस्था की गई है।
नगर निगम की कार्यकारिणी में दूसरे दिन शनिवार को बजट 2021-22 पर करीब पांच घंटे की चर्चा के बाद अंतिम मुहर लगी। महापौर की अध्यक्षता प्राविधानिक 702 करोड़ के बजट के बाद जल-कल के बजट 165 करोड़ पर बहस हुई। शहर के विकास पर 702 करोड़ खर्च होंगे, जबकि 165 करोड़ से शहर की पेयजल और सीवर व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी। बैठक में सदस्यों ने शहर की प्रकाश व्यवस्था का मुद्दा उठाया। उन्होंने निजी कंपनी के साथ ही निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि निजी कंपनी अनुबंध का हवाला देकर स्ट्रीट लाइट लगाने के बाद कोई काम नहीं करती। शहर की प्रकाश व्यवस्था को बेहतर करने के लिए 20 लाख रुपये के बजट को बढ़ाकर दो करोड़ रुपये कर दिया गया। कार्यकारिणी में वाहनों के मरम्मत, ईंधन और पार्ट्स खरीदने की मनमानी का मुद्दा फिर गरमाया। इस खर्च पर रोक लगाने के साथ ही खर्च होने वाले बजट में तीन करोड़ रुपये की कटौती की। पहले इसमें आठ करोड़ रुपये खर्च का प्रावधान था, इसमें तीन करोड़ रुपये की कटौती करते हुए पांच करोड़ रुपये कर दिया गया है।
इसके अलावा लेखा विभाग की आपत्तियों पर भी कार्यकारिणी में सवाल उठाया गया। सदस्यों ने कहा कि आय व्यय का हिसाब रखने वाले विभाग का आडिट ठीक नहीं होगा तो पारदर्शिता संभव नहीं है। लेखा विभाग ने आपत्तियों को सदन में प्रस्तुत किया। इसमें कर विभाग में 200, सामान्य विभाग में 138, राजस्व में 96 व अनुज्ञप्ति में 29 आपत्तियों के बारे में बताया गया।
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सीवर सफाई पर खर्च होंगे पांच करोड़ रुपये
कार्यकारिणी की दूसरे दिन की बैठक में जलकल के बजट पर लंबी चर्चा हुई और पेयजल व सीवर समस्या का मुद्दा उठाया गया। सीवर लाइन सफाई पर पांच करोड़ रुपये, सीवर लाइन के रखरखाव पर एक करोड़ रुपये, दूषित पेयजल सुधार पर एक करोड़, और घरों में लगे हुए सीवर सेफ्टी टैंक की सफाई के लिए 10 लाख रुपये बजट में रखा गया। कार्यकारिणी में नगर निगम के कामों और उससे मिलने वाले राजस्व को नगर निगम की निधि से अलग रखने पर चर्चा हुई। सदस्यों का कहना है कि स्मार्ट सिटी से हुए कामों पर नगर निगम की निधि नहीं खर्च की जाए। बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि स्मार्ट सिटी के तहत बन रही गलियों में नगर निगम की निधि नहीं लगाई जाए। इसे सभी सदस्यों की सहमति से पारित किया गया।
स्मार्ट सिटी के राजस्व का कैसे होगा हिसाब
कार्यकारिणी में स्मार्ट सिटी की परियोजनाओं से मिलने वाले राजस्व पर लंबी चर्चा हुई। सदस्यों ने नगर आयुक्त से पूछा कि आप स्मार्ट सिटी के सीईओ हैं तो आप बताएं कि स्मार्ट सिटी योजना से बन रही पार्किंग, दुकानें, पर्यटन के दृष्टिगत विकसित हो रहे तालाब, पार्क आदि से मिलने वाले राजस्व का हिसाब कौन रखेगा। सदस्यों ने रुद्राक्ष कंवेंशन सेंटर की भी चर्चा की कि इससके राजस्व को किस मद में रखा जाएगा। नगर आयुक्त ने बताया कि फिलहाल शासन से मार्गदर्शन लिया जाएगा और स्मार्ट सिटी के राजस्व को अलग रखा जाएगा।
बदला जाए जन्म मृत्यु पंजीयन कार्यालय
कार्यकारिणी में जन्म मृत्यु पंजीयन कार्यालय के पहली मंजिल पर होने का जिक्र कर चर्चा की गई कि यहां आने वाले लोगों केा दिक्कत होती है। कई बार बुजुर्ग और दिव्यांगों को ऊपर जाने में बहुत परेशानी होती है। ऐसे में इस कार्यालय को नगर निगम के भूतल पर रखा जाए। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। उधर, वेंडिंग जोन में कुछ लोगों की ओर से की जा रही अवैध वसूली का मुद्दा उठा। नगर आयुक्त ने इस मामले को डूडा से जांच कराने का निर्णय लिया।
नगर निगम बजट एक नजर में
प्राविधानिक बजट- 702 करोड़ रुपये
सीवर और पेयजल पर बजट- 165 करोड़ रुपये
कुल राजस्व और पूंजीगत
आय- 623.35 करोड़
अवशेष- 78.64 करोड़
- बदल सकता है मृत्यु पंजीयन कार्यालय का स्थान
- लेखा विभाग के आडिट पर उठाया गया सवाल
- स्मार्ट सिटी और नगर निगम के मद को अलग रखने का प्रस्ताव
- गौ सेवा के लिए अलग मद का प्रावधान, पब्लिक से भी सहयोग का प्रस्ताव
- सीसीटीवी का दायरा बढ़े, कार्यालयों में ऑनलाइन दिखे कैमरें और गुणवत्ता ठीक हो
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नगर निगम की कार्यकारिणी में दूसरे दिन शनिवार को बजट 2021-22 पर करीब पांच घंटे की चर्चा के बाद अंतिम मुहर लगी। महापौर की अध्यक्षता प्राविधानिक 702 करोड़ के बजट के बाद जल-कल के बजट 165 करोड़ पर बहस हुई। शहर के विकास पर 702 करोड़ खर्च होंगे, जबकि 165 करोड़ से शहर की पेयजल और सीवर व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी। बैठक में सदस्यों ने शहर की प्रकाश व्यवस्था का मुद्दा उठाया। उन्होंने निजी कंपनी के साथ ही निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि निजी कंपनी अनुबंध का हवाला देकर स्ट्रीट लाइट लगाने के बाद कोई काम नहीं करती। शहर की प्रकाश व्यवस्था को बेहतर करने के लिए 20 लाख रुपये के बजट को बढ़ाकर दो करोड़ रुपये कर दिया गया। कार्यकारिणी में वाहनों के मरम्मत, ईंधन और पार्ट्स खरीदने की मनमानी का मुद्दा फिर गरमाया। इस खर्च पर रोक लगाने के साथ ही खर्च होने वाले बजट में तीन करोड़ रुपये की कटौती की। पहले इसमें आठ करोड़ रुपये खर्च का प्रावधान था, इसमें तीन करोड़ रुपये की कटौती करते हुए पांच करोड़ रुपये कर दिया गया है।
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इसके अलावा लेखा विभाग की आपत्तियों पर भी कार्यकारिणी में सवाल उठाया गया। सदस्यों ने कहा कि आय व्यय का हिसाब रखने वाले विभाग का आडिट ठीक नहीं होगा तो पारदर्शिता संभव नहीं है। लेखा विभाग ने आपत्तियों को सदन में प्रस्तुत किया। इसमें कर विभाग में 200, सामान्य विभाग में 138, राजस्व में 96 व अनुज्ञप्ति में 29 आपत्तियों के बारे में बताया गया।
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सीवर सफाई पर खर्च होंगे पांच करोड़ रुपये
कार्यकारिणी की दूसरे दिन की बैठक में जलकल के बजट पर लंबी चर्चा हुई और पेयजल व सीवर समस्या का मुद्दा उठाया गया। सीवर लाइन सफाई पर पांच करोड़ रुपये, सीवर लाइन के रखरखाव पर एक करोड़ रुपये, दूषित पेयजल सुधार पर एक करोड़, और घरों में लगे हुए सीवर सेफ्टी टैंक की सफाई के लिए 10 लाख रुपये बजट में रखा गया। कार्यकारिणी में नगर निगम के कामों और उससे मिलने वाले राजस्व को नगर निगम की निधि से अलग रखने पर चर्चा हुई। सदस्यों का कहना है कि स्मार्ट सिटी से हुए कामों पर नगर निगम की निधि नहीं खर्च की जाए। बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि स्मार्ट सिटी के तहत बन रही गलियों में नगर निगम की निधि नहीं लगाई जाए। इसे सभी सदस्यों की सहमति से पारित किया गया।
स्मार्ट सिटी के राजस्व का कैसे होगा हिसाब
कार्यकारिणी में स्मार्ट सिटी की परियोजनाओं से मिलने वाले राजस्व पर लंबी चर्चा हुई। सदस्यों ने नगर आयुक्त से पूछा कि आप स्मार्ट सिटी के सीईओ हैं तो आप बताएं कि स्मार्ट सिटी योजना से बन रही पार्किंग, दुकानें, पर्यटन के दृष्टिगत विकसित हो रहे तालाब, पार्क आदि से मिलने वाले राजस्व का हिसाब कौन रखेगा। सदस्यों ने रुद्राक्ष कंवेंशन सेंटर की भी चर्चा की कि इससके राजस्व को किस मद में रखा जाएगा। नगर आयुक्त ने बताया कि फिलहाल शासन से मार्गदर्शन लिया जाएगा और स्मार्ट सिटी के राजस्व को अलग रखा जाएगा।
बदला जाए जन्म मृत्यु पंजीयन कार्यालय
कार्यकारिणी में जन्म मृत्यु पंजीयन कार्यालय के पहली मंजिल पर होने का जिक्र कर चर्चा की गई कि यहां आने वाले लोगों केा दिक्कत होती है। कई बार बुजुर्ग और दिव्यांगों को ऊपर जाने में बहुत परेशानी होती है। ऐसे में इस कार्यालय को नगर निगम के भूतल पर रखा जाए। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। उधर, वेंडिंग जोन में कुछ लोगों की ओर से की जा रही अवैध वसूली का मुद्दा उठा। नगर आयुक्त ने इस मामले को डूडा से जांच कराने का निर्णय लिया।
नगर निगम बजट एक नजर में
प्राविधानिक बजट- 702 करोड़ रुपये
सीवर और पेयजल पर बजट- 165 करोड़ रुपये
कुल राजस्व और पूंजीगत
आय- 623.35 करोड़
अवशेष- 78.64 करोड़
- बदल सकता है मृत्यु पंजीयन कार्यालय का स्थान
- लेखा विभाग के आडिट पर उठाया गया सवाल
- स्मार्ट सिटी और नगर निगम के मद को अलग रखने का प्रस्ताव
- गौ सेवा के लिए अलग मद का प्रावधान, पब्लिक से भी सहयोग का प्रस्ताव
- सीसीटीवी का दायरा बढ़े, कार्यालयों में ऑनलाइन दिखे कैमरें और गुणवत्ता ठीक हो