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काशी विद्यापीठ में रचा जाएगा ‘गांधी ग्रंथ’
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वाराणसी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था ‘खुद वह बदलाव बनिए जो दुनिया में आप देखना चाहते हैं’, इसी सोच के साथ महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में ‘गांधी ग्रंथ’ रचने की तैयारी की जा रही है। बापू के जीवन पर आधारित यह ग्रंथ शुरूआत में दो खंडों में तैयार होगा। इसमें बापू के विचार, कार्यों, आंदोलन, उनकी सोच और विचारों को शामिल किया जाएगा। इसके लिए विद्यापीठ प्रशासन और साबरमती आश्रम के बीच एमओयू हो चुका है। संपूर्ण विश्व से बापू पर हुए शोधपत्र मंगाए जा रहे हैं।
महात्मा गांधी केजन्म के 150वें वर्ष और काशी विद्यापीठ के शताब्दी वर्ष में बापू पर आधारित ग्रंथ के लिए पूरी दुनिया के समाजसेवी, विज्ञानी, तकनीकी विशेषज्ञ, पत्रकार, इतिहासकार, शिक्षाविद और शोध छात्रों से शोध पत्र आमंत्रित किए गए हैं। पहले दो खंडों में महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन, औद्योगीकरण, सामाजिक बदलाव, मानव उत्थान, आर्थिक नीतियों में योगदानों को सहेजा जाएगा। गांधी के दुर्लभ चित्र, देश विदेश की यात्राएं, आंदोलनों को भी प्रदर्शित किया जाएगा।
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महात्मा गांधी केजन्म के 150वें वर्ष और काशी विद्यापीठ के शताब्दी वर्ष में बापू पर आधारित ग्रंथ के लिए पूरी दुनिया के समाजसेवी, विज्ञानी, तकनीकी विशेषज्ञ, पत्रकार, इतिहासकार, शिक्षाविद और शोध छात्रों से शोध पत्र आमंत्रित किए गए हैं। पहले दो खंडों में महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन, औद्योगीकरण, सामाजिक बदलाव, मानव उत्थान, आर्थिक नीतियों में योगदानों को सहेजा जाएगा। गांधी के दुर्लभ चित्र, देश विदेश की यात्राएं, आंदोलनों को भी प्रदर्शित किया जाएगा।
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