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मोहर्रम का चांद दिखा, नया साल शुरू
Updated Wed, 12 Sep 2018 12:40 AM IST
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भदोही। इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मोहर्रमुलहराम के चांद का मंगलवार की शाम दीदार हो गया। ऐसे में बुधवार को हिजरी 1440 की पहली तारीख होगी। चांद के दीदार के बाद लोगो ने एक-दूसरे को नए साल की मुबारकबाद दी। वहीं, ताजियादार इमाम चौकों की साफ-सफाई में लग गए। रंगाई-पुताई कर इमाम चौकों पर अगरबत्ती जलाई गई। इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना मोहर्रम अपने साथ कई अजमतें और फजीलतें लेकर आता है। मोहर्रम का महीना कई मायने में इसलाम के उसूलों की जानकारी देता है। जो गलत राह पर हैं उन्हें सही रास्ता दिखाता है। दसवीं मोहर्रम के दिन हजरत मोहम्मद सल्ल. के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत को लोग भुला नहीं पा रहे हैं। उन्हीं की शहादत को याद करने के लिए सैकड़ो वर्षों से लोग ताजिया निकालते आ रहे हैं। मंगलवार की शाम चांद की तस्दीक होने पर लोगों द्वारा एक दूसरे को नए साल की बधाई देने का दौर शुरू हो गया। मर्यादपट्टी मदरसा शमसिया तेगिया के प्रिंसिपल मौलाना फैसल अशर्फी ने बताया कि मोहर्रम महीना अपने आप में इस्लाम का इतिहास समेटे हुए हैं। इस महीने की दस तारीख को यौमे आशूरा भी कहा जाता है। यह पूरा महीना इस्लामी नजरिए से बेहद अहमियत रखता है। मौलाना ने कहा कि दसवीं मोहर्रम को कर्बला के मैदान में इसलाम की सबसे बड़ी जंग हुई जिसमे हजरत इमाम हुसैन ने अपने साथ पूरा खानदान कुर्बान कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर अगर शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश करना है तो दसवीं के दिन रोजा रखें, इबादत में वक्त बिताएं और हजरत इमाम हुसैन की शहादत की जानकारी और लोगों को दें।
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