फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   हर साल लाखों खर्च, नहीं बढ़ा वनक्षेत्र

हर साल लाखों खर्च, नहीं बढ़ा वनक्षेत्र

Mon, 23 Apr 2018 01:12 AM IST
Updated Mon, 23 Apr 2018 01:12 AM IST
विज्ञापन
हर साल लाखों खर्च, नहीं बढ़ा वनक्षेत्र
ज्ञानपुर। पर्यावरण को बचाने और धरती को हरी-भरी बनाने के लिए जिले में हर साल 80 हजार से लेकर एक लाख तक पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन संरक्षण के अभाव में ज्यादातर सूख जाते हैं। पिछले पांच साल में करीब साढ़े तीन लाख पौधे रोपे गए और इनकी सुरक्षा के नाम पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए लेकिन जिले में वनक्षेत्र का दायरा 0.01 फीसदी से आगे नहीं बढ़ सका। यही वजह है कि वन विभाग के रजिस्टर में ही हरियाली दिखती है। सड़कों के किनारे, शहरों की कॉलोनियों, पार्कों या ग्रामीण इलाकों, हर तरफ उजाड़ बंजर नजर आता है।
विज्ञापन

पर्यावरण प्रदूषण से जूझ रहे जनमानस में पेड़-पौधों की उपयोगिता कितनी है, यह बताने की जरूरत नहीं है। पेड़ों से लकड़ी, शुद्ध हवा, छाया और जीवनरक्षक दवाएं तक मिलती हैं, लेकिन इन्हें सहेजने-संवारने की बजाय हम इनका विनाश करते जा रहे हैं। पौधे लगाओ, जीवन में खुशहाली लाओ... जैसे तमाम नारों के साथ हर साल पौधरोपण अभियान चलता है। वन विभाग के अधिकारी हों या सामाजिक संस्थाओं के लोग, फोटो खिंचवाने के बाद पौधों की सुरक्षा करना भूल जाते हैं। आमजन में भी कोई उत्साह और सहयोग नहीं दिखता। इस तरह मिशन हरियाली का सपना पूरा नहीं हो पा रहा।
विज्ञापन

भौतिक सुख-सुविधाओं की लालसा में हरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से असंतुलित होते पर्यावरण को बचाने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये खर्च कर पौधरोपण का आंकड़ा पेश कर दिया जाता है, लेकिन धरातल पर हरियाली नदारद है। वन विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो गत पांच वर्षों में करीब साढ़े तीन लाख पौधे विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रोपे गए। संरक्षण के अभाव में 70 से 80 फीसदी पौधे सूख गए। वर्ष 2013 में 70 हजार, 2014 में 85 हजार, 2015 में 92 हजार, 2016 में 88,500 और 2017 में एक लाख पांच हजार पौधे रोपे गए। पौधों के संरक्षण के लिए ट्री-गॉर्ड और ब्रिकगार्ड लगाने के लिए प्रति वर्ष 20 से 25 लाख रुपये शासन से आते हैं। जिला मुख्यालय के आसपास के कुछ इलाकों को छोड़ दिया जाए तो ग्रामीण अंचल में पौधों के संरक्षण के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही की गई है। यही वह है कि पौधरोपण के कुछ समय के बाद ही यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि पौधे कहां लगाए गए थे। प्रभारी डीएफओ राकेश चौधरी ने कहा कि पौधरोपण अभियान के 50 से 60 फीसदी पौधे बचते हैं। पौधों के संरक्षण के लिए आमजन को जागरूक होने की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed