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किरायेदारों का होता सत्यापन तो जाल न फैला पाता कामरान
Updated Thu, 04 Jan 2018 01:57 AM IST
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वाराणसी। बिहार के भागलपुर जिला निवासी कामरान रजा उर्फ अविनाश कुमार सिंह की शिवपुर क्षेत्र से हुई गिरफ्तारी ने जिले में किरायेदारों के पुलिस सत्यापन की कागजी खानापूर्ति एक बार फिर उजागर कर दी है। वह तीन महीने से शिवपुर में बतौर किरायेदार फर्जी नाम-पते के आधार पर रह रहा था। जानकारों का कहना है कि यदि थानेदार, हल्का प्रभारी और बीट आरक्षी किरायेदारों के सत्यापन में गंभीरता दिखाते तो लाखों की ठगी करने वाले कामरान को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया होता या फिर वह शहर छोड़कर भाग गया होता। आतंकी आशंका के मद्देनजर अति संवेदनशील होने के बावजूद किरायेदारों के सत्यापन में बरती जा रही चूक कभी किसी बड़ी मुसीबत का कारण बन सकती है।
भोलीभाली युवतियों को शादी और सामान्य लोगों को बैंक से फाइनेंस कराने का झांसा देकर भागलपुर निवासी कामरान रजा ने बीते आठ महीने में 50 लाख से ज्यादा रुपये हड़पे। वह शिवपुर थाना अंतर्गत सुभद्रा नगर कॉलोनी में तीन महीने से रह रहा था। उसने खुद को एसबीआई का बैंक मैनेजर आशुतोष कुमार सिंह बताते हुए नौ हजार रुपये प्रति माह पर किराये का कमरा ले रखा था। मगर, किरायेदारों के सत्यापन का दावा करने वाली पुलिस कामरान को नहीं पकड़ सकी। आखिरकार एटीएस ने मामले का पर्दाफाश करते हुए उसे गिरफ्तार कराया। किरायेदारों का सत्यापन न होने के कारण नवंबर 2017 में लखनऊ से गिरफ्तार हुआ लश्कर-ए-तैय्यबा का आतंकी अब्दुल नईम शेख भी बनारस में अलग-अलग ठिकानों पर रहा था। इससे पहले बीते नवंबर महीने की शुरुआत में नौ सौ करोड़ से ज्यादा के घोटाले का आरोपी रघु शेट्टी बाबतपुर एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। वह शिवपुर क्षेत्र में अपना कार्यालय खोलने की कोशिश में था और कैंट क्षेत्र में रह रहा था। जून 2016 में बिहार टॉपर्स घोटाले का अहम आरोपी लालकेश्वर सिंह और उसकी पत्नी ऊषा सिन्हा शहर स्थित एक मठ में शरण लिए हुए थे और दोनों को गिरफ्तार किया गया था। इस बारे में एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि किरायेदारों के सत्यापन के लिए हमेशा थानेदारों और हल्का प्रभारियों को ताकीद की जाती है। यह चूक किस स्तर पर हुई, इसकी छानबीन की जा रही है।
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भोलीभाली युवतियों को शादी और सामान्य लोगों को बैंक से फाइनेंस कराने का झांसा देकर भागलपुर निवासी कामरान रजा ने बीते आठ महीने में 50 लाख से ज्यादा रुपये हड़पे। वह शिवपुर थाना अंतर्गत सुभद्रा नगर कॉलोनी में तीन महीने से रह रहा था। उसने खुद को एसबीआई का बैंक मैनेजर आशुतोष कुमार सिंह बताते हुए नौ हजार रुपये प्रति माह पर किराये का कमरा ले रखा था। मगर, किरायेदारों के सत्यापन का दावा करने वाली पुलिस कामरान को नहीं पकड़ सकी। आखिरकार एटीएस ने मामले का पर्दाफाश करते हुए उसे गिरफ्तार कराया। किरायेदारों का सत्यापन न होने के कारण नवंबर 2017 में लखनऊ से गिरफ्तार हुआ लश्कर-ए-तैय्यबा का आतंकी अब्दुल नईम शेख भी बनारस में अलग-अलग ठिकानों पर रहा था। इससे पहले बीते नवंबर महीने की शुरुआत में नौ सौ करोड़ से ज्यादा के घोटाले का आरोपी रघु शेट्टी बाबतपुर एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। वह शिवपुर क्षेत्र में अपना कार्यालय खोलने की कोशिश में था और कैंट क्षेत्र में रह रहा था। जून 2016 में बिहार टॉपर्स घोटाले का अहम आरोपी लालकेश्वर सिंह और उसकी पत्नी ऊषा सिन्हा शहर स्थित एक मठ में शरण लिए हुए थे और दोनों को गिरफ्तार किया गया था। इस बारे में एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि किरायेदारों के सत्यापन के लिए हमेशा थानेदारों और हल्का प्रभारियों को ताकीद की जाती है। यह चूक किस स्तर पर हुई, इसकी छानबीन की जा रही है।
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