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आधुनिकता के संत थे स्वामी विवेकानंद : एमजे अकबर
Updated Mon, 18 Sep 2017 01:43 AM IST
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वाराणसी। स्वामी विवेकानंद को जितनी बार मैं पढ़ता हूं, हर बार नई जानकारियां मिलती हैं। स्वामी जी आधुनिकता के संत थे। हालांकि आधुनिकता की जो परिभाषा हम समझते हैं वह नहीं है। उनकी आधुनिकता का अर्थ है जहां हर इंसान बराबर हो। ये बातें विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने कहीं। वह रविवार को रामकृष्ण अद्वैत आश्रम, लक्सा में ‘स्वामी विवेकानंद की भारत को देन’ पुस्तक के विमोचन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
राज्यमंत्री कहा कि महिलाओं को स्वतंत्रता और प्रोत्साहन मिले तो वे घर, समाज और राष्ट्र के विकास में अहम भूमिका निभा सकती हैं। विशिष्ट अतिथि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. पृथ्वीश नाग ने कहा कि स्वामी जी भारत के आध्यात्मिक विश्वकर्मा थे। भारत ही एक ऐसा देश है, जिसके स्वतंत्रता आंदोलन में आध्यात्मिकता का समावेश था। महात्मा गांधी, मैक्समूलर, अरविंदो घोष, सी राजगोपालाचारी, जमशेद जी टाटा आदि ने स्वामी जी के विचारों से कुछ न कुछ लिया है। रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के सचिव स्वामी ऋतानंद महाराज ने कहा कि भगवान रामकृष्ण ने राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए स्वामी विवेकानंद को चुना। अध्यक्षता करते हुए स्वामी विश्वात्मानंद महाराज ने कहा कि समग्र पहलुओं पर देखने सम्यक दृष्टि स्वामी जी के पास थी। इसके पूर्व डॉ. रेवती साकलकर और सतरूपा चटर्जी ने भजन प्रस्तुत किए। संचालन डॉ. अभिषेक सिंह और धन्यवाद ज्ञापन देवाशीष दास ने किया।
स्वामी जी की स्मृतियों का संग्रह
वाराणसी। स्वामी विवेकानंद की भारत को देन पुस्तक स्वामी जी के वाराणसी आगमन की स्मृतियों से जुड़े व्यक्तियों, घटनाओं और स्थानों की सचित्र विवरणिका है। पांच खंडों में प्रकाशित इस पुस्तक में हिंदी, अंग्रेजी, बंगाली भाषा में लेख शामिल हैं। यह पुस्तक स्वामी जी के जन्म, रामकृष्ण की गुरुकृपा, परिव्राजक जीवन, विश्व धर्म महासभा और भारतीयों से जुड़े नए तथ्यों से अवगत कराती है। रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम और रामकृष्ण अद्वैत आश्रम के सहयोग से इसका प्रकाशन हुआ है।
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राज्यमंत्री कहा कि महिलाओं को स्वतंत्रता और प्रोत्साहन मिले तो वे घर, समाज और राष्ट्र के विकास में अहम भूमिका निभा सकती हैं। विशिष्ट अतिथि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. पृथ्वीश नाग ने कहा कि स्वामी जी भारत के आध्यात्मिक विश्वकर्मा थे। भारत ही एक ऐसा देश है, जिसके स्वतंत्रता आंदोलन में आध्यात्मिकता का समावेश था। महात्मा गांधी, मैक्समूलर, अरविंदो घोष, सी राजगोपालाचारी, जमशेद जी टाटा आदि ने स्वामी जी के विचारों से कुछ न कुछ लिया है। रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के सचिव स्वामी ऋतानंद महाराज ने कहा कि भगवान रामकृष्ण ने राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए स्वामी विवेकानंद को चुना। अध्यक्षता करते हुए स्वामी विश्वात्मानंद महाराज ने कहा कि समग्र पहलुओं पर देखने सम्यक दृष्टि स्वामी जी के पास थी। इसके पूर्व डॉ. रेवती साकलकर और सतरूपा चटर्जी ने भजन प्रस्तुत किए। संचालन डॉ. अभिषेक सिंह और धन्यवाद ज्ञापन देवाशीष दास ने किया।
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स्वामी जी की स्मृतियों का संग्रह
वाराणसी। स्वामी विवेकानंद की भारत को देन पुस्तक स्वामी जी के वाराणसी आगमन की स्मृतियों से जुड़े व्यक्तियों, घटनाओं और स्थानों की सचित्र विवरणिका है। पांच खंडों में प्रकाशित इस पुस्तक में हिंदी, अंग्रेजी, बंगाली भाषा में लेख शामिल हैं। यह पुस्तक स्वामी जी के जन्म, रामकृष्ण की गुरुकृपा, परिव्राजक जीवन, विश्व धर्म महासभा और भारतीयों से जुड़े नए तथ्यों से अवगत कराती है। रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम और रामकृष्ण अद्वैत आश्रम के सहयोग से इसका प्रकाशन हुआ है।
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