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सर्विस कॉरिडोर सफर आसान बनाएगा, जाम से भी बचाएगा
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वाराणसी। सड़कों की खोदाई और इसके कारण लगने वाले जाम से लोग हर दिन जूझते हैं। हाल ही में रथयात्रा-महमूरगंज मार्ग बनाया गया, लेकिन सीवर की पाइप लाइन जोड़ने के लिए जल निगम ने सड़क खोद दी। ऐसा तीन बार हो चुका है। पीडब्ल्यूडी और आईआईटी के विशेषज्ञ इसका एकमात्र समाधान सर्विस कॉरिडोर को मानते हैं।
शहर में कई जगह सड़क के बीच से सीवर और पानी सहित अन्य पाइप लाइनें गुजरती हैं, जबकि कई अन्य शहरों में सड़क के दोनों ओर फुटपाथ के नीचे सर्विस कॉरिडोर बनाए गए हैं और इन्हीं से सीवर, पानी सहित अन्य लाइनें निकाली जाती हैं। इससे वहां सड़कें बार-बार नहीं खोदने की समस्या नहीं आती है।
आईआईटी बीएचयू के एसोसिएशट प्रोफेसर बृंद कुमार का कहना है कि सर्विस कॉरिडोर के संबंध में लखनऊ में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से बातचीत हुई थी। उन्हें नक्शे के जरिए समझाया गया था कि यदि सड़क के दोनों तरफ सर्विस कॉरिडोर हो तो सीवर, बिजली, पानी, टेलीफोन की लाइन के लिए बार-बार खुदाई नहीं करनी पड़ेगी। इससे रोड कटिंग का पैसा बचेगा और यातायात पर भी असर नहीं पड़ेगा। सर्विस कॉरिडोर में बीच-बीच में इंस्पेक्शन होल होने चाहिए, ताकि खराबी आने पर इनके जरिए अंदर जाकर मरम्मत कराई जा सके।
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सड़क के दोनों ओर एक टनल बनाई जाती है। इसमें सीवर, बिजली, पानी, टेलीफोन की लाइनें डालने के लिए जगह दी जाती है। इसकी एवज में जिस विभाग की सड़क होती है, वह किराया वसूलता है। लाइनों में खराबी आने पर सड़क की खुदाई किए बिना मरम्मत हो जाती है।
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शहर में कई जगह सड़क के बीच से सीवर और पानी सहित अन्य पाइप लाइनें गुजरती हैं, जबकि कई अन्य शहरों में सड़क के दोनों ओर फुटपाथ के नीचे सर्विस कॉरिडोर बनाए गए हैं और इन्हीं से सीवर, पानी सहित अन्य लाइनें निकाली जाती हैं। इससे वहां सड़कें बार-बार नहीं खोदने की समस्या नहीं आती है।
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आईआईटी बीएचयू के एसोसिएशट प्रोफेसर बृंद कुमार का कहना है कि सर्विस कॉरिडोर के संबंध में लखनऊ में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से बातचीत हुई थी। उन्हें नक्शे के जरिए समझाया गया था कि यदि सड़क के दोनों तरफ सर्विस कॉरिडोर हो तो सीवर, बिजली, पानी, टेलीफोन की लाइन के लिए बार-बार खुदाई नहीं करनी पड़ेगी। इससे रोड कटिंग का पैसा बचेगा और यातायात पर भी असर नहीं पड़ेगा। सर्विस कॉरिडोर में बीच-बीच में इंस्पेक्शन होल होने चाहिए, ताकि खराबी आने पर इनके जरिए अंदर जाकर मरम्मत कराई जा सके।
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सड़क के दोनों ओर एक टनल बनाई जाती है। इसमें सीवर, बिजली, पानी, टेलीफोन की लाइनें डालने के लिए जगह दी जाती है। इसकी एवज में जिस विभाग की सड़क होती है, वह किराया वसूलता है। लाइनों में खराबी आने पर सड़क की खुदाई किए बिना मरम्मत हो जाती है।