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लहरतारा स्थित मठ में तीन दिवीसीय संत कबीर महामहोत्सव शुरू
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वाराणर्सी। ‘कबीर जब हम पैदा हुए, जग हंसे हम रोये, ऐसी करनी कर चलो, हम हंसे जग रोये’ जैसे दोहों से समाज का हर चेहरा सामने लाने वाले संत कबीर की जन्म स्थली लहरतारा में शुक्रवार को तीन दिवसीय संत कबीर प्राकट्य महामहोत्सव शुरू हो गया। कार्यक्रम की शुरूआत हजूर अर्धनाम साहेब ने श्वेत ध्वजारोहण करके किया। इसके बाद शाम को प्रवचन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कबीरपंथी शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरूआत भजनों की प्रस्तुति से हुई। हजूर अर्धनाम साहेब ने मंदिर के गर्भगृह में संत स्वरूप को माल्यर्पण और पूजन के बाद आरती उतारी। इसके बाद कार्यक्रम में पहुंचे देश भर के संत जीवन दास साहेब, मनोहर दास साहेब, मोतीदास साहेब के अलावा विश्वपाल साहेब ने भी पूजा-अर्चना किया। हूजर अर्धनाम साहेब ने प्रवचन के दौरान कहा कि आज के 621 वर्ष पहले जेष्ठ माह के पूर्णिमा के दिन ही लहरतारा में कबीर साहेब का जन्म हुआ था। इसलिए हर साल यहां पर तीन दिन का महोत्सव आयोजित किया जाता है। उन्होंने बताया कि कबीर साहेब के वाणी-वचन से जिसको ज्ञान मिला उसका जीवन धन्य हो गया। साहेब ने जीवन में प्रेम एकता और मानवता का बोध कराया। वहीं शाम को भी भक्ति भजन और प्रवचन का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, यूपी, बिहार, दिल्ली, छत्तीसगढ़ से आए बड़ी संख्या में कबीर पंथी लोग शामिल रहे।
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कार्यक्रम की शुरूआत भजनों की प्रस्तुति से हुई। हजूर अर्धनाम साहेब ने मंदिर के गर्भगृह में संत स्वरूप को माल्यर्पण और पूजन के बाद आरती उतारी। इसके बाद कार्यक्रम में पहुंचे देश भर के संत जीवन दास साहेब, मनोहर दास साहेब, मोतीदास साहेब के अलावा विश्वपाल साहेब ने भी पूजा-अर्चना किया। हूजर अर्धनाम साहेब ने प्रवचन के दौरान कहा कि आज के 621 वर्ष पहले जेष्ठ माह के पूर्णिमा के दिन ही लहरतारा में कबीर साहेब का जन्म हुआ था। इसलिए हर साल यहां पर तीन दिन का महोत्सव आयोजित किया जाता है। उन्होंने बताया कि कबीर साहेब के वाणी-वचन से जिसको ज्ञान मिला उसका जीवन धन्य हो गया। साहेब ने जीवन में प्रेम एकता और मानवता का बोध कराया। वहीं शाम को भी भक्ति भजन और प्रवचन का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, यूपी, बिहार, दिल्ली, छत्तीसगढ़ से आए बड़ी संख्या में कबीर पंथी लोग शामिल रहे।
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