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अस्पताल में टीवी और होर्डिंग्स के नाम पर करोड़ों का फर्जीवाड़ा
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वाराणसी। सरकारी कार्यालय में टीवी स्क्रीन और होर्डिंग्स के विज्ञापन से करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा किया जा रहा था। महिला अस्पताल में बाकायदा समझौता पत्र बनाकर जगह-जगह टीवी स्क्रीन से विज्ञापन दिखाए जा रहे थे और परिसर में निजी कंपनियों के होर्डिंग्स से करोड़ों का खेल हो रहा था। इसी एमओयू के जरिए दूसरे सरकारी कार्यालयों में भी नेटवर्क फैलाने की कोशिश की जा रही थी। जिलाधिकारी की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने पर कैंट थाने में मुकदमा भी दर्ज कराया गया है।
महिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरपी कुशवाहा ने गैलेक्सी एडवरटाइजर्स के अभिजीत शर्मा के साथ एक समझौता कर अस्पताल परिसर में 30 एलईडी स्क्रीन लगवा दी। उनका दावा था कि जन जागरूकता संबंधी प्रचार का प्रसारण किया जाएगा। मगर, इसकी आड़ में इन स्क्रीन पर निजी कंपनियों और संस्थानों के विज्ञापन दिखाए जा रहे थे और उसके एवज में सरकारी विज्ञापन के रेटलिस्ट से वसूली की जाती थी।
इसी आधार पर दूसरे कार्यालयों में भी एलईडी स्क्रीन लगाने के प्रयास शुरू हुए। जिलाधिकारी सुरेेंद्र सिंह को इसी भनक लगी तो उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच कराई तो इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इसमें निजी कंपनियों से एक करोड़ 18 लाख रुपये विज्ञापन के जरिए जुटाया जा रहा था। डीएम ने बताया कि महिला अस्पताल के अधीक्षक की भूमिका की जांच कराई जा रही है। फिलहाल मुकदमा दर्ज करा दिया गया है।
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महिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरपी कुशवाहा ने गैलेक्सी एडवरटाइजर्स के अभिजीत शर्मा के साथ एक समझौता कर अस्पताल परिसर में 30 एलईडी स्क्रीन लगवा दी। उनका दावा था कि जन जागरूकता संबंधी प्रचार का प्रसारण किया जाएगा। मगर, इसकी आड़ में इन स्क्रीन पर निजी कंपनियों और संस्थानों के विज्ञापन दिखाए जा रहे थे और उसके एवज में सरकारी विज्ञापन के रेटलिस्ट से वसूली की जाती थी।
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इसी आधार पर दूसरे कार्यालयों में भी एलईडी स्क्रीन लगाने के प्रयास शुरू हुए। जिलाधिकारी सुरेेंद्र सिंह को इसी भनक लगी तो उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच कराई तो इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इसमें निजी कंपनियों से एक करोड़ 18 लाख रुपये विज्ञापन के जरिए जुटाया जा रहा था। डीएम ने बताया कि महिला अस्पताल के अधीक्षक की भूमिका की जांच कराई जा रही है। फिलहाल मुकदमा दर्ज करा दिया गया है।
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