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ट्रांसपोर्ट नगर के लिए किसानों से समझौता करेगा वीडीए
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वाराणसी। करीब डेढ़ दशक पुरानी ट्रांसपोर्ट नगर योजना के लिए वीडीए ने एक बार फिर कसरत शुरू की है। वीडीए के अधिकारियों ने गुरुवार को किसानों की बैठक वीडीए सभागार में बुलाई है। इसमें किसानों की मंशा जानी जाएगी और उसी आधार पर समझौते की कोशिश की जाएगी।
शासन के निर्देश के बाद वीडीए ने समझौते के आधार पर इस योजना को मूर्त रूप देने की रणनीति बनाई है। इसके लिए मंगलवार को किसानों से संपर्क साधा और गुरुवार को वीडीए सभागार में आयोजित बैठक में आने की अपील की गई है। इसमें वीडीए के अधिकारी किसानों की मंशा जानेंगे। इसी आधार पर समझौते का प्रारूप तैयार किया जाएगा, ताकि ट्रांसपोर्ट नगर योजना को धरातल पर उतारा जा सके। उधर, किसानों ने भी बैठक के लिए तैयारी शुरू कर दी है और मांगों से संबंधित बिंदु तैयार कर रहे हैं। वीडीए के तहसीलदार अविनाश कुमार ने बताया कि जमीन और खर्च किए गए रुपयों पर वार्ता के लिए किसानों की बैठक बुलाई गई है। वार्ता के बाद किसानों की मंशा के अनुरूप योजना को क्रियान्वित कराया जाएगा।
शहर को बड़े मालवाहक वाहनों के जाम से निजात दिलाने के लिए वीडीए ने वर्ष 2003 में सराय मोहन में ट्रांसपोर्ट नगर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया था। इसमें चार गांवों बैरवन, सरायमोहन, करनाडाडी और मिल्किचक गांव के 1,194 किसानों की 86 हेक्टेयर जमीन खरीदी जानी थी। उस समय इसकी संभावित लागत करीब 9.5 करोड़ थी। उस दौरान जमीन खरीदने और खरीदी गई जमीन पर कब्जा लेने में की गई लापरवाही से यह योजना फंस गई। 35 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद बीडीए मात्र 45 हेक्टेयर जमीन खरीद पाया है। दस्तावेजों में नाम भी चढ़ गया है, लेकिन कब्जा अब भी किसानों का ही है। इधर, 15 सालों में जमीन की कीमत और संसाधनों के बढ़ते दाम के चलते यह योजना करीब 100 गुना महंगी हो गई और वीडीए के लिए योजना पूरी करना मुश्किल हो गया। उधर किसान भी इस योजना के विरोध में आ गए। इसके बाद से मामला न्यायालय में लंबित है।
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शासन के निर्देश के बाद वीडीए ने समझौते के आधार पर इस योजना को मूर्त रूप देने की रणनीति बनाई है। इसके लिए मंगलवार को किसानों से संपर्क साधा और गुरुवार को वीडीए सभागार में आयोजित बैठक में आने की अपील की गई है। इसमें वीडीए के अधिकारी किसानों की मंशा जानेंगे। इसी आधार पर समझौते का प्रारूप तैयार किया जाएगा, ताकि ट्रांसपोर्ट नगर योजना को धरातल पर उतारा जा सके। उधर, किसानों ने भी बैठक के लिए तैयारी शुरू कर दी है और मांगों से संबंधित बिंदु तैयार कर रहे हैं। वीडीए के तहसीलदार अविनाश कुमार ने बताया कि जमीन और खर्च किए गए रुपयों पर वार्ता के लिए किसानों की बैठक बुलाई गई है। वार्ता के बाद किसानों की मंशा के अनुरूप योजना को क्रियान्वित कराया जाएगा।
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शहर को बड़े मालवाहक वाहनों के जाम से निजात दिलाने के लिए वीडीए ने वर्ष 2003 में सराय मोहन में ट्रांसपोर्ट नगर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया था। इसमें चार गांवों बैरवन, सरायमोहन, करनाडाडी और मिल्किचक गांव के 1,194 किसानों की 86 हेक्टेयर जमीन खरीदी जानी थी। उस समय इसकी संभावित लागत करीब 9.5 करोड़ थी। उस दौरान जमीन खरीदने और खरीदी गई जमीन पर कब्जा लेने में की गई लापरवाही से यह योजना फंस गई। 35 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद बीडीए मात्र 45 हेक्टेयर जमीन खरीद पाया है। दस्तावेजों में नाम भी चढ़ गया है, लेकिन कब्जा अब भी किसानों का ही है। इधर, 15 सालों में जमीन की कीमत और संसाधनों के बढ़ते दाम के चलते यह योजना करीब 100 गुना महंगी हो गई और वीडीए के लिए योजना पूरी करना मुश्किल हो गया। उधर किसान भी इस योजना के विरोध में आ गए। इसके बाद से मामला न्यायालय में लंबित है।
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