{"_id":"5ceaf82fbdec22074618b7aa","slug":"155890288014-varanasi-news7","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘इंजेक्शन लगवा सकते हैं बशर्ते ताकत का न हो’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘इंजेक्शन लगवा सकते हैं बशर्ते ताकत का न हो’
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। रमजान की बरकतें इन दिनों अपने उरूज पर हैं। हर मुसलमान औरत, मर्द, बालिग खुदा की रजा हासिल करने लिए रोजा रख रहे हैं। तिलावत में मशगूल हैं और अपने गुनाहों की माफी के साथ ही अल्लाह को राजी करने में जुटा है।
इसके साथ ही रोजेदार के सामने ऐसे कई मसले आते हैं, जिनका जवाब पाने के लिए उसे मुफ्ती और बड़े उलेमा की जरूरत महसूस होती है। सवाल लेकर लोग मुफ्ती-ए-शहर मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी के पास पहुंच रहे हैं। शहर-ए-मुफ्ती की ओर से कुरान और हदीस की रोशनी में इनके जवाब दिए जा रहे हैं। रोजाना दोपहर दो से शाम चार बजे के बीच पीली कोठी स्थित आजाद पार्क के पास मस्जिद अबू हनीफा में उनसे मिलकर भी सवाल पूछे जा सकते हैं।
एक रोजेदार ने सवाल किया कि यदि वह अचानक बीमार हो जाए और इंजेक्शन की नौबत आए तो क्या करे। बताया गया कि इंजेक्शन लगवाने से रोजा नहीं टूटता। इंजेक्शन लगवा सकते हैं लेकिन इंजेक्शन ताकत का नहीं होना चाहिए। रोजे में इंसान भूखा-प्यासा रह कर अल्लाह की इबादत करता है। इंजेक्शन से अगर जिस्म को ताकत मिले तो यह जायज नहीं है। किसी खातून ने सवाल पूछा कि हामला (गर्भवती) रोजा रख सकती है ? जवाब मिला, बिल्कुल नहीं। इससे खातून की तबीयत तो खराब होगी ही, हमल में मौजूद बच्चे को भी नुकसान हो सकता है। प्रसव के बाद जब तंदुरुस्त हो जाएं तो कजा रोजे रखें।
विज्ञापन
शुगर के एक मरीज ने जानना चाहा कि रोजा रखने में उसे किन बातों पर अमल करना होगा। बताया गया कि अगर शुगर और हार्ट के मरीज है तो रोजा न रखें। अगर रोजा सेहत के लिए नुकसान का सबब बन रहा है तो छोड़ दें। बाद में इसकी कजा रखें। जिस्म में खून की कमी के दौरान भी रोजा न रखें। ऐसे में जान जाने का खतरा है तो रोजा छोड़ दें। बाद में उसकी कजा रखें। सफर के दौरान भी रोजा न रखने का हुक्म आया है। लिहाजा सफर से लौटें तो रोजा रखें और बचे हुए रोजों की कजा करें।
विज्ञापन
इसके साथ ही रोजेदार के सामने ऐसे कई मसले आते हैं, जिनका जवाब पाने के लिए उसे मुफ्ती और बड़े उलेमा की जरूरत महसूस होती है। सवाल लेकर लोग मुफ्ती-ए-शहर मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी के पास पहुंच रहे हैं। शहर-ए-मुफ्ती की ओर से कुरान और हदीस की रोशनी में इनके जवाब दिए जा रहे हैं। रोजाना दोपहर दो से शाम चार बजे के बीच पीली कोठी स्थित आजाद पार्क के पास मस्जिद अबू हनीफा में उनसे मिलकर भी सवाल पूछे जा सकते हैं।
विज्ञापन
एक रोजेदार ने सवाल किया कि यदि वह अचानक बीमार हो जाए और इंजेक्शन की नौबत आए तो क्या करे। बताया गया कि इंजेक्शन लगवाने से रोजा नहीं टूटता। इंजेक्शन लगवा सकते हैं लेकिन इंजेक्शन ताकत का नहीं होना चाहिए। रोजे में इंसान भूखा-प्यासा रह कर अल्लाह की इबादत करता है। इंजेक्शन से अगर जिस्म को ताकत मिले तो यह जायज नहीं है। किसी खातून ने सवाल पूछा कि हामला (गर्भवती) रोजा रख सकती है ? जवाब मिला, बिल्कुल नहीं। इससे खातून की तबीयत तो खराब होगी ही, हमल में मौजूद बच्चे को भी नुकसान हो सकता है। प्रसव के बाद जब तंदुरुस्त हो जाएं तो कजा रोजे रखें।
विज्ञापन
शुगर के एक मरीज ने जानना चाहा कि रोजा रखने में उसे किन बातों पर अमल करना होगा। बताया गया कि अगर शुगर और हार्ट के मरीज है तो रोजा न रखें। अगर रोजा सेहत के लिए नुकसान का सबब बन रहा है तो छोड़ दें। बाद में इसकी कजा रखें। जिस्म में खून की कमी के दौरान भी रोजा न रखें। ऐसे में जान जाने का खतरा है तो रोजा छोड़ दें। बाद में उसकी कजा रखें। सफर के दौरान भी रोजा न रखने का हुक्म आया है। लिहाजा सफर से लौटें तो रोजा रखें और बचे हुए रोजों की कजा करें।