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‘बिना आस्था के नहीं बन सकतीं जनकल्याणकारी नीतियां’
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वाराणसी। बीएचयू समाज विज्ञान संकाय के संबोधि सभागार में न्यू इंडिया डायलॉग के तहत संवाद श्रृंखला में वक्ताओं ने सामाजिक विज्ञान और मानविकी के संदर्भ में स्मृति और समझ पर चर्चा की। बतौर मुख्य वक्ता जेएनयू के सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज के प्रोफेसर व अटल बिहारी वाजपेयी प्रबंध संस्थान के संकाय प्रमुख प्रो. हीरामन तिवारी ने कहा कि स्मृति ज्ञान का पर्याय रही है। बिना आस्था और प्रतीति के जनकल्याणकारी नीतियां नहीं बन सकती हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संकल्पित न्यू इंडिया डायलॉग के तहत आयोजित संवाद में बीएचयू सामाजिक विज्ञान संकाय के प्रमुख प्रो. आरपी पाठक ने कहा कि नीतिशास्त्र, धर्मशास्त्र और अर्थशास्त्र, भारतीय ज्ञान परंपरा के तीन आधार रहे हैं। अध्यक्षता करते हुए प्राचीन इतिहास एवं संस्कृृति विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. विभा त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय परंपरा में स्मृृति बोझ नहीं, अपितु आशीष होती है। इस दौरान प्रो. बिंदा परांजपे, प्रो. राकेश पांडेय, प्रो. अरविंद जोशी के साथ ही शिक्षक, छात्र मौजूद रहे।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संकल्पित न्यू इंडिया डायलॉग के तहत आयोजित संवाद में बीएचयू सामाजिक विज्ञान संकाय के प्रमुख प्रो. आरपी पाठक ने कहा कि नीतिशास्त्र, धर्मशास्त्र और अर्थशास्त्र, भारतीय ज्ञान परंपरा के तीन आधार रहे हैं। अध्यक्षता करते हुए प्राचीन इतिहास एवं संस्कृृति विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. विभा त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय परंपरा में स्मृृति बोझ नहीं, अपितु आशीष होती है। इस दौरान प्रो. बिंदा परांजपे, प्रो. राकेश पांडेय, प्रो. अरविंद जोशी के साथ ही शिक्षक, छात्र मौजूद रहे।
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