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संस्कृत में कमेंट्री ने हर किसी को चौंकाया
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वाराणसी। ‘अतीव सुंदरतया कंदुक प्रक्षेपणम् फलक धारक: स्तब्धोजात:। दंडाग्रे पादे कंदुकस्पर्शाद बहिर्भूत:। कंदुकस्य रेखाया: बहिर्गमनम्। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के खेल मैदान में दिन भर चली क्रिकेट की संस्कृत में कमेंट्री लोगों को अपनी ओर खींचती रही। ‘चतुर्धानावांक:’(चौका), ‘षड्धावनांक: लब्ध:(छक्का)’ जब भी गूंजा जमकर तालियां बजीं। मौका था शास्त्रार्थ महाविद्यालय के 75वें हीरक जयंती समारोह के अवसर पर मंगलवार को आयोजित क्रिकेट प्रतियोगिता का।
कंमेट्रेटर डॉ. शेषनारायण मिश्र, डॉ. राघवशरण मिश्र व आचार्य विकास दीक्षित ने कई बार उपस्थित दर्शकों की तालियां बटोरी। खिलाड़ियों का भी उत्साह देखते बना। खिलाड़ी फील्डिंग लगाने से लेकर बातचीत भी संस्कृत में कर रहे थे। मैच की अंपायरिंग पूर्व रणजी खिलाड़ी धीरज मिश्र व संजीव तिवारी कर रहे थे। खिलाड़ी टीका, त्रिपुंड लगाकर धोती धारण कर रखे थे। प्रतियोगिता का उद्घाटन कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल, अंतरराष्ट्रीय मास्टर एथलीट नीलू मिश्रा व काशी विश्वनाथ मंदिर के अर्चक पंडित श्रीकांत मिश्र ने खिलाड़ियों का परिचय प्राप्त कर किया। प्रतियोगिता में पांच टीमों ने हिस्सा लिया। शास्त्रार्थ अ, शास्त्रार्थ ब, इंटरनेशनल चंद्रमौली संस्थान, चल्ला शास्त्री वेद विद्यालय, ब्रह्मदेव विद्यालय शामिल रहे। फाइनल मुकाबला शास्त्रार्थ ब और ब्रह्मादेव विद्यालय के बीच खेला गया। टास जीतकर बैटिंग करते हुए ब्रह्मादेव ने 67 रन बनाए। जवाब में खेलने उतरी शास्त्रार्थ ब की पूरी टीम 65 रन ही बना सकी। मानवेंद्र को मैन आफ दि मैच का पुरस्कार दिया गया। इससे पूर्व ब्रह्मदेव विद्यालय ने टास जीतकर पहले क्षेत्ररक्षण चुना। ओठ ओवर में चंद्रमौली संस्थान को 43 रनों पर समेट दिया। जवाब में खेलने उतरी ब्रह्मदेव की टीम ने बिना कोई विकेट गंवाए पांच ओवर में ही लक्ष्य को पा लिया। दूसरा मैच शास्त्रार्थ अ और चल्ला शास्त्री वेद विद्यालय के बीच हुआ। इसमें वेद विद्यालय विजयी रहा। क्वार्टर फाइनल ब्रह्मावेद विद्यालय और चल्ला शास्त्री वेद विद्यालय के बीच हुआ। इसमें ब्रह्मावेद विद्यालय ने जीत दर्ज की। कार्यक्रम संयोजक डॉ. गणेश दत्त शास्त्री रहे।
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कंमेट्रेटर डॉ. शेषनारायण मिश्र, डॉ. राघवशरण मिश्र व आचार्य विकास दीक्षित ने कई बार उपस्थित दर्शकों की तालियां बटोरी। खिलाड़ियों का भी उत्साह देखते बना। खिलाड़ी फील्डिंग लगाने से लेकर बातचीत भी संस्कृत में कर रहे थे। मैच की अंपायरिंग पूर्व रणजी खिलाड़ी धीरज मिश्र व संजीव तिवारी कर रहे थे। खिलाड़ी टीका, त्रिपुंड लगाकर धोती धारण कर रखे थे। प्रतियोगिता का उद्घाटन कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल, अंतरराष्ट्रीय मास्टर एथलीट नीलू मिश्रा व काशी विश्वनाथ मंदिर के अर्चक पंडित श्रीकांत मिश्र ने खिलाड़ियों का परिचय प्राप्त कर किया। प्रतियोगिता में पांच टीमों ने हिस्सा लिया। शास्त्रार्थ अ, शास्त्रार्थ ब, इंटरनेशनल चंद्रमौली संस्थान, चल्ला शास्त्री वेद विद्यालय, ब्रह्मदेव विद्यालय शामिल रहे। फाइनल मुकाबला शास्त्रार्थ ब और ब्रह्मादेव विद्यालय के बीच खेला गया। टास जीतकर बैटिंग करते हुए ब्रह्मादेव ने 67 रन बनाए। जवाब में खेलने उतरी शास्त्रार्थ ब की पूरी टीम 65 रन ही बना सकी। मानवेंद्र को मैन आफ दि मैच का पुरस्कार दिया गया। इससे पूर्व ब्रह्मदेव विद्यालय ने टास जीतकर पहले क्षेत्ररक्षण चुना। ओठ ओवर में चंद्रमौली संस्थान को 43 रनों पर समेट दिया। जवाब में खेलने उतरी ब्रह्मदेव की टीम ने बिना कोई विकेट गंवाए पांच ओवर में ही लक्ष्य को पा लिया। दूसरा मैच शास्त्रार्थ अ और चल्ला शास्त्री वेद विद्यालय के बीच हुआ। इसमें वेद विद्यालय विजयी रहा। क्वार्टर फाइनल ब्रह्मावेद विद्यालय और चल्ला शास्त्री वेद विद्यालय के बीच हुआ। इसमें ब्रह्मावेद विद्यालय ने जीत दर्ज की। कार्यक्रम संयोजक डॉ. गणेश दत्त शास्त्री रहे।
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