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श्रीलंका से सारनाथ पहुंचा भगवान बुद्ध का पवित्र अस्थि कलश 0
Updated Fri, 04 May 2018 01:48 AM IST
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वाराणसी। भगवान बुद्ध का पवित्र अस्थि कलश गुरुवार की शाम को श्रीलंका से विशेष विमान से वाराणसी पहुंचा। अस्थि कलश को विशेष पूजा पाठ के बाद उसे पुन: मूलगंध कुटी विहार परिसर में स्थित बुद्ध मन्दिर में रख दिया गया। तथागत का पवित्र अस्थिकलश 28 मई को श्रीलंका भेजा गया था। के लिए गयी थी। सारनाथ पहुंचने पर पवित्र अस्थि कलश का पारंपरिक रूप से स्वागत किया गया। इस दौरान बौद्ध वाद्य यन्त्रों को बजाया गया। उसके बाद महाबोधि सोसायटी के महासचिव भन्ते पी सिबली थेरो के नेतृत्व में पूजा कर उसे अपने पूर्ववत स्थान पर रखा गया ।
भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थि को सारनाथ स्थित महाबोधि सोसाइटी के देखरेख में मूलगंध कुटी विहार मंदिर में विशेष सुरक्षा के तहत रखा गया है। जिसे कार्तिक पूर्णिमा पर तीन दिन के मंदिर में रखा जाता है। इस दौरान श्री लंका सहित विभिन्न बौद्ध देशों के लाखों लोग पवित्र अस्थि का दर्शन पूजन कर अपने भाग्यशाली मानते हैं। श्रीलंका सरकार के आग्रह पर महाबोधि सोसाइटी ऑफ इण्डिया के महासचिव पी सिबली थेरो, मूलगंध कुटी विहाराधिपति के. मेधंाकर थेरो सहित अन्य बौद्ध भिक्षु उक्त पवित्र अस्थि को लेकर 28 अप्रैल को रवाना हुए थे। वहां श्रीलंका के राष्ट्रपति आवास पर पवित्र अस्थि को दर्शनार्थ रखा गया था। इस दौरान दर्जनों की संख्या में बौद्ध भिक्षु सहित भारतीय पुरातत्व विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
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भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थि को सारनाथ स्थित महाबोधि सोसाइटी के देखरेख में मूलगंध कुटी विहार मंदिर में विशेष सुरक्षा के तहत रखा गया है। जिसे कार्तिक पूर्णिमा पर तीन दिन के मंदिर में रखा जाता है। इस दौरान श्री लंका सहित विभिन्न बौद्ध देशों के लाखों लोग पवित्र अस्थि का दर्शन पूजन कर अपने भाग्यशाली मानते हैं। श्रीलंका सरकार के आग्रह पर महाबोधि सोसाइटी ऑफ इण्डिया के महासचिव पी सिबली थेरो, मूलगंध कुटी विहाराधिपति के. मेधंाकर थेरो सहित अन्य बौद्ध भिक्षु उक्त पवित्र अस्थि को लेकर 28 अप्रैल को रवाना हुए थे। वहां श्रीलंका के राष्ट्रपति आवास पर पवित्र अस्थि को दर्शनार्थ रखा गया था। इस दौरान दर्जनों की संख्या में बौद्ध भिक्षु सहित भारतीय पुरातत्व विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
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