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नहरों में उड़ रही धूल, किसान चिंतित
Updated Thu, 15 Jun 2017 12:24 AM IST
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नहरों में उड़ रही धूल, नर्सरी के लिए किसान चिंतित
ज्ञानपुर। आषाढ़ शुरू होने के साथ धान की रोपाई के लिए किसान नर्सरी डालने लगे हैं, लेकिन नहरों में धूल उड़ने से नर्सरी डालने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कृषि विभाग का दावा है कि केंद्रों पर भरपूर बीज आ चुके हैं लेकिन गिने-चुने प्रजाति का बीज आने से किसान निजी दूकानों से बेहतर वेरायटी के बीज लेने को विवश हैं। वहीं दूसरी ओर उर्द और मूंग की खेती अब गिने-चुने किसान ही करते हैं।
बारिश का सीजन आते ही खरीफ की खेती की तैयारी शुरू हो गई है। किसानों के साथ कृषि विभाग ने भी तैयारी तेज कर दी है। किसानों के सहूलियत के लिए सरकार अनुदानित बीज उपलब्ध करा रही है लेकिन वेरायटी बेहतर न होने से उसका लाभ किसान नहीं ले पा रहे हैं। नर्सरी डालने के समय नहरों में पानी न आने से किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। निजी पंपो के सहारे वह नर्सरी डाल रहे हैं। संसारापुर के किसान गोपीनाथ दूबे ने बताया कि राजकीय कृषि केंद्रों पर पुरानी प्रजाति के बीज आए हैं, जिसे लोग पसंद नहीं कर रहे हैं। बेहतर प्रजाति के बीच लेने के लिए उन्हें निजी दूकानों का सहारा लेना पड़ रहा है। उप कृषि निदेशक धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि राजकीय कृषि भंडारों पर धान का स्वर्णा, एनडीआर, शुष्क सम्राट प्रजाति का बीज आया है, जिसमें शुष्क सम्राट बीज शत प्रतिशत अनुदानित है। कृषि विशेषज्ञ एके चौबे ने कहा कि धान की नर्सरी डालने से पहले खेत को बेहतर ढंग से तैयार कर लें। नर्सरी डालने से पूर्व किसान ट्राइकोडर्मा चार से छह ग्राम या कार्बेंडाजिम से बीज का शोधन जरूर करें। नर्सरी किसान शाम को डालें तो बेहतर होगा।
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ज्ञानपुर। आषाढ़ शुरू होने के साथ धान की रोपाई के लिए किसान नर्सरी डालने लगे हैं, लेकिन नहरों में धूल उड़ने से नर्सरी डालने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कृषि विभाग का दावा है कि केंद्रों पर भरपूर बीज आ चुके हैं लेकिन गिने-चुने प्रजाति का बीज आने से किसान निजी दूकानों से बेहतर वेरायटी के बीज लेने को विवश हैं। वहीं दूसरी ओर उर्द और मूंग की खेती अब गिने-चुने किसान ही करते हैं।
बारिश का सीजन आते ही खरीफ की खेती की तैयारी शुरू हो गई है। किसानों के साथ कृषि विभाग ने भी तैयारी तेज कर दी है। किसानों के सहूलियत के लिए सरकार अनुदानित बीज उपलब्ध करा रही है लेकिन वेरायटी बेहतर न होने से उसका लाभ किसान नहीं ले पा रहे हैं। नर्सरी डालने के समय नहरों में पानी न आने से किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। निजी पंपो के सहारे वह नर्सरी डाल रहे हैं। संसारापुर के किसान गोपीनाथ दूबे ने बताया कि राजकीय कृषि केंद्रों पर पुरानी प्रजाति के बीज आए हैं, जिसे लोग पसंद नहीं कर रहे हैं। बेहतर प्रजाति के बीच लेने के लिए उन्हें निजी दूकानों का सहारा लेना पड़ रहा है। उप कृषि निदेशक धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि राजकीय कृषि भंडारों पर धान का स्वर्णा, एनडीआर, शुष्क सम्राट प्रजाति का बीज आया है, जिसमें शुष्क सम्राट बीज शत प्रतिशत अनुदानित है। कृषि विशेषज्ञ एके चौबे ने कहा कि धान की नर्सरी डालने से पहले खेत को बेहतर ढंग से तैयार कर लें। नर्सरी डालने से पूर्व किसान ट्राइकोडर्मा चार से छह ग्राम या कार्बेंडाजिम से बीज का शोधन जरूर करें। नर्सरी किसान शाम को डालें तो बेहतर होगा।
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