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कालीनों में अलग-अलग तय करें जीएसटी

Wed, 31 Jan 2018 01:32 AM IST
Updated Wed, 31 Jan 2018 01:32 AM IST
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कालीनों में अलग-अलग तय करें जीएसटी
भदोही। कालीन निर्यातकों के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु से मुलाकात कर जीएसटी और ड्रॉ बैक संबंधी समस्याएं रखीं। निर्यातकों ने कहा कि हाथ और मशीन से बनी कालीनों में जीएसटी दरें अलग-अलग निर्धारित की जाएं। इस पर मंत्री ने उनकी समस्याओं पर विचार करने का आश्वासन दिया है।
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प्रतिनिधिमंडल में शामिल अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) के पीयूष बरनवाल ने बताया कि उन लोगों ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि जीएसटी युग में हस्तनिर्मित और मशीनमेड कालीनों को अलग-अलग कर जीएसटी दरें भी अलग-अलग की जाएं। इसके अलावा कालीन बिक्री पर जीएसटी खत्म किया जाए। साथ ही जॉबवर्क पर जीएसटी पूरी तरह से समाप्त करने की मांग की गई, क्योंकि इससे मजदूर बुनकर प्रभावित हो रहे हैं।
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सदस्यों ने उन्हें बताया कि बीते दिनों कई उद्योगों की ड्रॉ बैक दरें बढ़ाई गईं, जिसमें कालीन उद्योग शामिल नहीं है। कहा कि कालीन पर ड्रॉ-बैक दरों को भी बढ़ाया जाए। मांग की गई की पूर्व दरों को 30 जून तक लागू रखा जाए, क्योंकि कालीन निर्माण प्रक्रिया महीनों चलती है और उद्यमियों को पुराने स्टाक खत्म करने के लिए समय दिया जाना चाहिए। प्रतिनिधिमंडल में शामिल कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के चेयरमैन महावीर प्रताप उर्फ राजा शर्मा ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने समस्याओं पर विचार करने का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल में ईडी संजय कुमार, रवि पाटोदिया, ओपी गर्ग और सुभाष मित्तल भी शामिल थे।
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