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पुस्तक मेले को एप्स से जोड़ने की जरूरत
Updated Mon, 06 Nov 2017 02:38 AM IST
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वाराणसी। पुस्तक और साहित्य से निरंतर संबंध रखने से व्यक्ति कभी अकेला नहीं रहता। पुस्तक मेला समाज को नई सोच और शिक्षित बनाने में सराहनीय भूमिका निभाते हैं। समय के हिसाब से पुस्तक मेले को डिजिटल फार्म में लाने और एप्स से जोड़ने की जरूरत है ताकि इसे आसानी से हर घर-घर पहुंचाया जा सके। रविवार को चंदुआ छित्तूपुर स्थित कुशवाहा भवन में 22वें बनारस पुस्तक मेले के उद्घाटन में ये बातें काशी विद्यापीठ के वाणिज्य संकाय के प्रो. केएस जायसवाल ने कहीं।
विशिष्ट अतिथि डा. रत्नेश कुमार वर्मा ने कहा कि समाज में पुस्तकों का न रहना आत्मा के बिना शरीर के समान है। मिथिलेश कुमार कुशवाहा ने कहा कि बाल साहित्य पर ज्यादा देना चाहिए। अध्यक्षता कर रहे डॉ. एचए आजमी ने कहा कि पुस्तकें न पढ़ने का रिवाज बढ़ रहा है, जो चिंता का विषय है। छोटे बच्चों में कहानी की पुस्तकों पर जोर देना चाहिए। आजकल के छात्रों का ज्ञान अपडेट तो रहता है पर उसमें गहराई नहीं होती। इस अवसर पर मोतीलाल को सम्मानित किया गया। संचालन एमएस कुशवाहा एवं धन्यवाद ज्ञापन अवधेश कुमार कुशवाहा ने किया। कार्यक्रम में डॉ. दयानंद, बैरिस्टर सिंह, जगदीश प्रसाद, लाल जी, अमरनाथ कुशवाहा, संदीप वर्मा, राजेंद्र कुमार पाल और डॉ. वत्सला दयाल आदि मौजूद थीं।
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विशिष्ट अतिथि डा. रत्नेश कुमार वर्मा ने कहा कि समाज में पुस्तकों का न रहना आत्मा के बिना शरीर के समान है। मिथिलेश कुमार कुशवाहा ने कहा कि बाल साहित्य पर ज्यादा देना चाहिए। अध्यक्षता कर रहे डॉ. एचए आजमी ने कहा कि पुस्तकें न पढ़ने का रिवाज बढ़ रहा है, जो चिंता का विषय है। छोटे बच्चों में कहानी की पुस्तकों पर जोर देना चाहिए। आजकल के छात्रों का ज्ञान अपडेट तो रहता है पर उसमें गहराई नहीं होती। इस अवसर पर मोतीलाल को सम्मानित किया गया। संचालन एमएस कुशवाहा एवं धन्यवाद ज्ञापन अवधेश कुमार कुशवाहा ने किया। कार्यक्रम में डॉ. दयानंद, बैरिस्टर सिंह, जगदीश प्रसाद, लाल जी, अमरनाथ कुशवाहा, संदीप वर्मा, राजेंद्र कुमार पाल और डॉ. वत्सला दयाल आदि मौजूद थीं।
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