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नए शोध से खेती-किसानी की बदलेंगे तस्वीर
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वाराणसी। कृषि में स्नातक करने वाले अधिकांश युवा खेती-किसानी में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। वह कृषि कार्य को जीविकोपार्जन के मुख्य साधन के रूप में नहीं देखते हैं। यही वजह है कि कृषि क्षेत्र में होने वाले नए शोधों का खेती किसानी में प्रयोग नहीं हो पा रहा है। बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के पुरातन छात्र संगठन की ओर से शनिवार से आयोजित होने वाले तीन दिवसीय संगोष्ठी में नवीन शोधों के माध्यम से खेती-किसानी की तस्वीर बदले जाने पर वैज्ञानिक मंथन करेंगे। शुक्रवार को संस्थान के निदेशक प्रो. ए वैशंपायन ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि वर्तमान में देश में किसानों की आर्थिक स्थिति अन्य विकसित देशों के किसानों से काफी कमजोर है, इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
संस्थान के निदेशक ने बताया कि कृषि शिक्षा एवं शोध में वैश्विक साझेदारी विषयक संगोष्ठी में बदलते वैश्विक परिवेश में यह जरूरी है कि कृषि शिक्षा और शोध में आमूलचूल परिवर्तन किया जाय जिससे यह वर्तमान व भविष्य की बाजार व्यवस्था के अनुरूप हो सके और अधिक से अधिक छात्रों को जीविकोपार्जन प्रदान करने में सक्षम हो। समन्वयक प्रो. रमेश चंद्र ने कृषि शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में संस्थान की उपलब्धियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। बताया कि कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभाने वाले 500 से अधिक पुरातन छात्र संगोष्ठी में शामिल होंगे।
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संस्थान के निदेशक ने बताया कि कृषि शिक्षा एवं शोध में वैश्विक साझेदारी विषयक संगोष्ठी में बदलते वैश्विक परिवेश में यह जरूरी है कि कृषि शिक्षा और शोध में आमूलचूल परिवर्तन किया जाय जिससे यह वर्तमान व भविष्य की बाजार व्यवस्था के अनुरूप हो सके और अधिक से अधिक छात्रों को जीविकोपार्जन प्रदान करने में सक्षम हो। समन्वयक प्रो. रमेश चंद्र ने कृषि शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में संस्थान की उपलब्धियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। बताया कि कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभाने वाले 500 से अधिक पुरातन छात्र संगोष्ठी में शामिल होंगे।
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