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कानूनी दायरे में लाए जाएं सभी औद्योगिक फोरम
Updated Thu, 15 Nov 2018 02:07 AM IST
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वाराणसी। पूर्वांचल में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए उद्यमियों ने सभी फोरमों (जिला उद्योग बंधु, मंडलीय उद्योग बंधु और राज्यस्तरीय उद्योग बंधु) को कानून के दायरे में लाने की मांग की है। उनका मानना है कि इससे समस्याओं के समयबद्ध निस्तारण के साथ ही लापरवाही बरतने वालों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई में आसानी होगी।
इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन (आईआईए) की डिवीजनल इकाई की एक बैठक बुधवार को गंगा की लहरों पर सवार क्रूज पर आयोजित हुई। उद्यमियों ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को प्रोत्साहित कर रहे हैं। परिणामत: भारत की रैकिंग में 50वें पायदान पर सुधार के साथ आगे बढ़ रहा है। दूसरी ओर सरकार ने यूपी पब्लिक प्रक्योरमेंट पॉलिसी के तहत एसएमएसई से 20 प्रतिशत की निश्चित खरीद की बात कही थी, जबकि सरकारी विभाग और उपक्रम तरह-तरह के प्रतिबंध लगाकर योजना को पलीता लगा रहे हैं।
सुझाव दिया कि मेक इन इंडिया के अंतर्गत 50 फीसदी सामग्री की खरीद प्रदेश की इकाइयों से ही होना चाहिए। एमएसएमई एक्ट 2006 के तहत क्रेता को 45 दिन में भुगतान एमएसएमई को करना होता है अन्यथा चक्रवृद्धि ब्याज लगेगा। बावजूद इसके बहुत से निगम और उपक्रम अपने टेंडर अभिलेख में इसका उल्लेख नहीं करते हैं। इसका सख्ती से पालन कराना जरूरी किया जाए।
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अध्यक्षता डिवीजनल चेयरमैन आरके चौधरी और संचालन आईआईए के अध्यक्ष राजेश भाटिया ने किया। बैठक में अशोक गुप्ता, नीरज पारिख, राजकुमार शर्मा, डीसी मिश्रा, राहुल मेहता, अनुज डिडवानिया, श्रीनारायण खेमका आदि मौजूद रहे।
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इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन (आईआईए) की डिवीजनल इकाई की एक बैठक बुधवार को गंगा की लहरों पर सवार क्रूज पर आयोजित हुई। उद्यमियों ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को प्रोत्साहित कर रहे हैं। परिणामत: भारत की रैकिंग में 50वें पायदान पर सुधार के साथ आगे बढ़ रहा है। दूसरी ओर सरकार ने यूपी पब्लिक प्रक्योरमेंट पॉलिसी के तहत एसएमएसई से 20 प्रतिशत की निश्चित खरीद की बात कही थी, जबकि सरकारी विभाग और उपक्रम तरह-तरह के प्रतिबंध लगाकर योजना को पलीता लगा रहे हैं।
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सुझाव दिया कि मेक इन इंडिया के अंतर्गत 50 फीसदी सामग्री की खरीद प्रदेश की इकाइयों से ही होना चाहिए। एमएसएमई एक्ट 2006 के तहत क्रेता को 45 दिन में भुगतान एमएसएमई को करना होता है अन्यथा चक्रवृद्धि ब्याज लगेगा। बावजूद इसके बहुत से निगम और उपक्रम अपने टेंडर अभिलेख में इसका उल्लेख नहीं करते हैं। इसका सख्ती से पालन कराना जरूरी किया जाए।
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अध्यक्षता डिवीजनल चेयरमैन आरके चौधरी और संचालन आईआईए के अध्यक्ष राजेश भाटिया ने किया। बैठक में अशोक गुप्ता, नीरज पारिख, राजकुमार शर्मा, डीसी मिश्रा, राहुल मेहता, अनुज डिडवानिया, श्रीनारायण खेमका आदि मौजूद रहे।
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