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अशांत होती जा रही है महामना की बगिया, जिम्मेदार कौन
Updated Wed, 26 Sep 2018 02:08 AM IST
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वाराणसी। महामना की बगिया में आए दिन बवाल होता है। इस अशांति के लिए जिम्मेदार कौन है और उन पर कार्रवाई क्यों नहीं होती इस पर बीएचयू प्रबंधन हमेशा मौन रहता है। हॉस्टल में मूलभूत सुविधियां की कमी और प्रबंधन की संवादहीनता अक्सर स्थिति को और बिगाड़ देती है।
कभी हॉस्टल में मेस न चलने की समस्या तो कभी बिजली-पानी की समस्या को लेकर छात्र आए दिन धरना-प्रदर्शन करते हैं। एक छोटी सी बात पर शुरू हुआ आंदोलन प्रबंधन की संवादहीनता से बवाल में बदल जाता है। आगजनी, पत्थरबाजी, तोड़फोड़ जैसी घटनाएं हो जाती हैं।
विश्वविद्यालय परिसर का माहौल शांतिपूर्ण बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों सहित अन्य अधिकारियों के पास है। ये अधिकारी हर बार विफल रहते हैं। उनकी भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं और बीएचयू प्रबंधन घटनाओं को रूटीन मानकर चुप्पी ओढ़ लेता है। जब भी माहौल अशांत होता है विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था और हॉस्टलों से जुड़े अधिकारी भी सामने नहीं आते। इसे लेकर अब तक कई बार पुलिस के आला अधिकारी आपत्ति जता चुके हैं। घटना के समय हॉस्टलों में छात्रों और वार्डन आदि के बीच संवाद बनाए रखने की बात भी की जाती है लेकिन इसका अनुपालन भी नहीं हो पाता है।
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कभी हॉस्टल में मेस न चलने की समस्या तो कभी बिजली-पानी की समस्या को लेकर छात्र आए दिन धरना-प्रदर्शन करते हैं। एक छोटी सी बात पर शुरू हुआ आंदोलन प्रबंधन की संवादहीनता से बवाल में बदल जाता है। आगजनी, पत्थरबाजी, तोड़फोड़ जैसी घटनाएं हो जाती हैं।
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विश्वविद्यालय परिसर का माहौल शांतिपूर्ण बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों सहित अन्य अधिकारियों के पास है। ये अधिकारी हर बार विफल रहते हैं। उनकी भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं और बीएचयू प्रबंधन घटनाओं को रूटीन मानकर चुप्पी ओढ़ लेता है। जब भी माहौल अशांत होता है विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था और हॉस्टलों से जुड़े अधिकारी भी सामने नहीं आते। इसे लेकर अब तक कई बार पुलिस के आला अधिकारी आपत्ति जता चुके हैं। घटना के समय हॉस्टलों में छात्रों और वार्डन आदि के बीच संवाद बनाए रखने की बात भी की जाती है लेकिन इसका अनुपालन भी नहीं हो पाता है।
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