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कर्मचारियों की मिलीभगत से गायब हुई पत्रावली
Updated Sat, 19 Aug 2017 01:47 AM IST
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वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के रिकार्ड रूम से पत्रावलियां गायब होने में प्रथम दृष्टया कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई है। मामले की जांच कर रही चेतगंज पुलिस अधिकारियों के बयान के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंची है। इसको देखते हुए पुलिस ने 1984 से अब तक के कर्मचारियों और अधिकारियों का विवरण विश्वविद्यालय प्रशासन से तलब किया है।
विनयाधिकारी लालजी मिश्र द्वारा चेतगंज थाने में चार जून को दर्ज मुकदमे के अनुसार देवरिया के घनश्याम दास आर्य वैदिक गुरुकुल महाविद्यालय की वर्ष 1984 की संबद्धता की पत्रावली गायब है। पुलिस की जांच में पता चला है कि अधीक्षक एवं अभिलेखपाल और कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से पत्रावली गायब की गई है। पुलिस ने इस मामले में कुलसचिव प्रभाष द्विवेदी एवं अभिलेखपाल नरेंद्र कुमार चौबे का बयान दर्ज किया है। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन से वर्ष 1982 से अब तक के परीक्षा नियंत्रक, विभागाध्यक्ष, रिकार्ड कीपर और डिस्पैचर के नाम, पता, नियुक्ति अवधि और मोबाइल नंबर मांगा है। इस बारे में कुलपति प्रो. यदुनाथ दूबे का कहना है कि पुलिस को जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा। सन् 1982 के अभिलेखों की जांच करना थोड़ा मुश्किल काम है। उस समय के कर्मचारियों में गिने चुने ही वर्तमान में जीवित हैं।
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विनयाधिकारी लालजी मिश्र द्वारा चेतगंज थाने में चार जून को दर्ज मुकदमे के अनुसार देवरिया के घनश्याम दास आर्य वैदिक गुरुकुल महाविद्यालय की वर्ष 1984 की संबद्धता की पत्रावली गायब है। पुलिस की जांच में पता चला है कि अधीक्षक एवं अभिलेखपाल और कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से पत्रावली गायब की गई है। पुलिस ने इस मामले में कुलसचिव प्रभाष द्विवेदी एवं अभिलेखपाल नरेंद्र कुमार चौबे का बयान दर्ज किया है। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन से वर्ष 1982 से अब तक के परीक्षा नियंत्रक, विभागाध्यक्ष, रिकार्ड कीपर और डिस्पैचर के नाम, पता, नियुक्ति अवधि और मोबाइल नंबर मांगा है। इस बारे में कुलपति प्रो. यदुनाथ दूबे का कहना है कि पुलिस को जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा। सन् 1982 के अभिलेखों की जांच करना थोड़ा मुश्किल काम है। उस समय के कर्मचारियों में गिने चुने ही वर्तमान में जीवित हैं।
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